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अजोला नामक चारे से आएगी श्वेत क्रांति

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जोगिंद्रनगर। पशुपालकों के लिए अच्छी खबर यह है कि चारे के लिए उन्हें अब थोड़ी मेहनत करने पर अधिक पौष्टिकता मिल सकेगी और अधिक खर्च से भी निजात मिल जाएगी। चारे की पौष्टिकता बढ़ाने के लिए जोगिंद्रनगर के उपमंडलीय पशु चिकित्सालय में हाल ही में तैनात डॉ. अरूण शर्मा ने ‘अजोला‘ नामक चारे के उत्पादन को बढ़ाने देने का सिलसिला शुरू किया गया है, जिसके लिए उन्होंने अस्पताल परिसर में ही अजोला का डेमो पिट भी बनाया है। डा. अरूण शर्मा के अनुसार प्रोटीन, विटामिन व विभिन्न खनिजों से भरपूर अजोला चारे को पशुपालक अपने घर पर ही तैयार करके दुधारू पशुओं से अधिक दूध प्राप्त कर सकेंगे।

  • दुधारू पशुओं के लिए पौष्टिक आहार है अजोला

अजोला पशु चारे को आधुनिक तकनीक से भूमि के छोटे से टुकड़े पर भी पैदा किया जा सकेगा। इसकी तकनीक के लिए डॉ. अरूण शर्मा ने अस्पताल परिसर में एक छोटा सा डेमो प्लॉट बनाकर अजोला उगाने का क्रम शुरू कर दिया है जिससे वह किसानों को इसे उगाने की तकनीकी जानकारी भी देते हैं। 

एक हेक्टेयर में 300 क्विंटल के करीब पैदावार 

अजोला का बीज भविष्य में अस्पताल से निशुल्क प्रदान करने की भी डॉ. अरूण ने तैयारी कर ली है ताकि इलाका भर में किसानों को पशुओं के लिए पौष्टिक चारा उपलब्ध हो सके तथा फीड आदि पर उनका व्यय कम हो सके। विटामिन, प्रोटीन, कैल्शियम व फासफोरस आदि से भरपूर अजोला चारे की पैदावार काफी आसान है। एक मीटर गुणा एक मीटर के गड्डे में पानी भरकर उसमें एक किलो गोबर की मदद से अजोला तैयार हो सकता है, महज उसमें उपयुक्त मात्रा में अजोला का बीज डालना होता है। अरूण शर्मा के अनुसार मक्की की पैदावार एक हेक्टेयर में 300 क्विंटल के करीब होती है लेकिन अजोला की पैदावार करीब 1700 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है।

अजोला का चारा घास में मिलाकर पशुओं को बेहतरीन पौष्टिक आहार दिया जा सकता है जिससे दुधारू पशुओं से अधिक दूध लिया जा सकता है। डॉ. अरूण शर्मा ने बताया कि अजोला को 20 डिग्री सेलसियस तापमान में महज 15 दिनों में तैयार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अजोला के अतिरिक्त जोगिंद्रनगर के चिकित्सालय परिसर में उन्नत किस्म के जिमी, ऐस्टिेरिया, फेस्टियो आदि ग्रास भी डेमो के तौर पर उगाए जाते हैं और किसानों को इस बाबत न केवल जागरूक ही किया जाता है बल्कि उन्हें उन्नत किस्म के घास का बीज निशुल्क भी दिया जाता है। डॉ. शर्मा के अनुसार अजोला सहित अन्य प्रजाति के चारे आदि के लिए किसानों को जागरूक होने की आवश्यकता है ताकि न केवल पशुओं को उत्तम किस्म का चारा मिल सके बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो सके।

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