कुंडलिनी : हमारे भीतर का वह खजाना जिसका इस्तेमाल नहीं हुआ

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कुंडलिनी जब शांत होती है तो आपको इसके होने का पता भी नहीं होता। जब यह गतिशील होती है तब आपको पता चलता है कि आपके भीतर इतनी ऊर्जा भी है। इसी वजह से कुंडलिनी को सर्प के रूप में चित्रित किया जाता है। कुंडली मारकर बैठा हुआ सांप अगर हिले-डुले नहीं, तो उसे देखना बहुत मुश्किल होता है।

अगर आपकी कुंडलिनी जागृत है, तो आपके साथ ऐसी चमत्कारिक चीजें घटित होने लगेंगी, जिनकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। कुंडलिनी जागृत होने से ऊर्जा का एक पूरी तरह से नया स्तर जीवंत होने लगता है और आपका शरीर और बाकी सब कुछ भी बिल्कुल अलग तरीके से काम करने लगता है। ऊर्जा की उच्च अवस्था में समझ और बोध की अवस्था भी उच्च होती है। पूरे के पूरे यौगिक सिस्टम का मकसद आपकी समझ और बोध को बेहतर बनाना है। इससे जाहिर होता है कि उनकी ऊर्जा उच्चतम अवस्था तक पहुंच गई है। उनकी ऊर्जा उनके सिर की चोटी तक पहुंच गई है और इसीलिए उनकी तीसरी आंख खुल गई है। तीसरी आंख का अर्थ यह नहीं है कि किसी के माथे में कोई आंख निकल आई है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि आपकी समझ का एक और पहलु खुल गया है।

दो आंखों से सिर्फ वही चीजें देखी जा सकती हैं जो स्थूल हैं। यह तीसरी आंख भीतर की ओर देखती है, जिससे जीवन बिल्कुल अलग तरह से दिखता है। इसके खुलने का मतलब है कि हर चीज का अनुभव किया जा सकता है। कुंडलिनी आपके भीतर वह खजाना है, जिसका अब तक इस्तेमाल नहीं हुआ है, जिसका अब तक लाभ नहीं उठाया गया है। आप उस ऊर्जा का इस्तेमाल करके उसे बिल्कुल अलग आयाम में रूपांतरित कर सकते हैं, एक ऐसे आयाम में जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते। जब तक परमाणु को तोड़ा नहीं गया था तब तक किसी को पता भी नहीं था कि इतने छोटे से कण में इतनी जबर्दस्त ऊर्जा मौजूद है। इसी तरह से इंसान भी एक जैविक परमाणु है, जीवन की एक इकाई है। इंसान के भीतर भी वैसी ही जबर्दस्त ऊर्जा मौजूद है। कुंडलिनी जागरण का मतलब यह है कि आपने उस अपार ऊर्जा के इस्तेमाल की तकनीक को पा लिया है।

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