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पूजा में कलश के ऊपर किस दिशा में रखें नारियल

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हम जब भी कोई शुभ काम करते हैं तो उसमें कलश जरुर बैठाते हैं। कलश बैठाए बिना काम शुरु नहीं होता। पूजा में रखा जाने वाला कलश धातु के बर्तन का या मिट्टी के बर्तन का भी हो सकता है। लेकिन हर कलश के ऊपर एक कच्चा नारियल जरुर होता है जो लाल रंग के कपड़े में लिपटा होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कलश के ऊपर नारियल क्यों रखा जाता है।नारियल की शिखाओं में सकारात्मक ऊर्जा का भंडार पाया जाता है। नारियल की शिखाओं में मौजूद ऊर्जा तरंगों के माध्यम से कलश के जल में पहुंचती है। यह तरंगें काफी सूक्ष्म होती हैं।शास्त्रों के अनुसार कलश स्थापना किसी भी शुभ काम को मंगलमय तरीके से पूर्ण होने के लिए किया जाता है। इसलिए कलश में सभी तीर्थों को आमंत्रित किया जाता है। नारियल लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। इसलिए कलश के ऊपर नारियल रखते हैं। इसका उद्देश्य यह होता है कि कलश में स्थित देवता और तीर्थ मंगलकारी हों और देवी लक्ष्मी की कृपा से उन्नति बनी रहे। शास्त्रों में कलश पर नारियल रखने के विषय में बताया गया है कि “अधोमुखं शत्रु विवर्धनाय, ऊर्धवस्य वस्त्रं बहुरोग वृध्यै। प्राचीमुखं वित विनाशनाय, तस्तमात‍् शुभं संमुख्यं नारीलेलंष्।” यानी कलश पर नरियल रखते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि नारियल का मुख नीचे की तरफ नहीं हो। छिले हुए नारियल को आपने देखा होगा तो पाया होगा कि इसके सिरे पर तीन काले बिंदू होते हैं। माना जाता है कि यह नारियल के आंख और मुख हैं। नारियल का मुख उस दिशा में होता है जिधर से वह पेड़ से लगा होता है। इसलिए अब से कलश बैठाते समय इन बातों का ध्यान रखना लाभप्रद होगा।

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