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वास्तुशास्त्र में मिट्टी की अहमियत

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वास्तुशास्त्र भारत का अत्यन्त प्राचीन शास्त्र है। प्राचीन काल में वास्तुकला सभी कलाओं की जननी कही जाती थी। आज भी जितने भवन और बिल्डिंग आदि बन रही है अधिकांश में वास्तु के हिसाब से बनाया जा रहा है। इस शास्त्र के अनुसार मिट्टी को बहुत ही महत्वपूर्ण और उपयोगी माना जाता है। मिट्टी सुख-शांति और सौभाग्य का प्रतीक होती है।घर में ज्यादा से ज्यादा मिट्टी के बर्तन का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि इसके पीछे कई धार्मिक और वैज्ञानिक कारण होते है। हमारे पूर्वज भी मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल करते थे। मिट्टी से बनी हुई चीजें सुख, सम्रद्धि का कारक होती है। मिट्टी के बर्तनों का उपयोग करने से हमारा जीवन भाग्यशाली बन सकता है।

  • घर-दुकान की उत्तर-पूर्वी दिशा में मिट्टी से बने पक्षी रखने से वहां किसी तरह की नेगेटिविटी बुरा प्रभाव नहीं डाल पाती। साथ ही आपका बुरा समय अच्छे में बदलने लगता है।
  • घर के मंदिर में भगवान की मूर्ति मिट्टी से बनी होनी चाहिए। ऐसा होने पर कई तरह की परेशानियां दूर होती हैं और घर-परिवार में धन की कोई भी कमी नहीं होती।
  • घर के किचन में हमेशा मिट्टी का घड़ा रखना ही चाहिए। मिट्टी के घड़े का पानी पीने से शरीर तो स्वस्थ रहता है साथ ही वहां पॉजिटिव एनर्जी का प्रभाव रहता है।
  • रोज घर और दुकान में मिट्टी के दीये जलाकर रोशनी जरूर करनी चाहिए। अगर किसी के दांपत्य जीवन में परेशानियां चल रही हैं तो उसे नियमित तुलसी के पौधे पर मिट्टी का दीया लगाना चाहिए।
  • मिट्टी से ही बने कुल्हड़ में चाय या लस्सी पीने से मंगल ग्रह का नकारात्मक प्रभाव कम होता है और अटके हुए जरूरी कामों में आ रही रुकावटें खत्म होती हैं
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