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ॐ का सही उच्चारण कब व कैसे

इस मंत्र का जाप करने से मन हमेशा शांत रहता है।

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ॐ के उच्चारण से जो ध्वनि उत्पन्न होती है, वही इस ब्रह्मांड की उत्पत्ति के समय प्रथम ध्वनि थी। यह एक ऐसा उच्चारण है जो शरीर, आत्मा और मन सभी को तृप्त करता है और रोग –दोषों से राहत दिलाला है। इस मंत्र के जप का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे मन में आने वाले अनजाने भय दूर हो जाते हैं।

इस मंत्र का जाप करने से मन हमेशा शांत रहता है। और तनाव दूर हो जाते हैं। बहुत से लोद मंत्र बोलते समय इसका सही उच्चारण नहीं कर पाते तो उनको इसका सहीं लाभ नहीं मिल पाता है। प्रातः उठकर पवित्र होकर ओंकार ध्वनि का उच्चारण करें। ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं। जानते हैं ऊं उच्चारण के सही नियम

– सबसे पहले ॐ का जाप करने के लिये एक शांत स्‍थान का चुनाव करना चाहिये क्‍योंकि इससे जो ध्वनि निकलती है उसी से हमें तरह तरह के लाभ प्राप्‍त होते हैं।
-ऊं के अभ्यास से स्मरण शक्ति तेज होती है। बट्टों को शुरू से ही इस मंत्र का अभ्यास करवाना चाहिए।
– दिन के किसी भी समय में ऐसे ही जाप नहीं कर लेना चाहिये, बल्‍कि जब ईश्वरीय शक्ति अपने चरम पर हों तभी जाप करें।

ऊं के पहले शब्द के उच्चारण करने से कंपन पैदा होती है। इस कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।
अधिक लाभ पाने के लिये ॐ का जाप सुबह सुबह या फिर रात को सोने से पहले करें, जिससे आपको अच्‍छा फल मिले।
ॐ शब्‍द को कभी धीरे नहीं बोलना चाहिये नहीं तो इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा। इस शब्‍द जितना जोर आवाज में बोलेंगे यह उतना ही ज्‍यादा फल मिलेगा।
ॐ का जाप करने के लिए किसी भगवान की मूर्ति, चित्र, धूप, अगरबत्ती या दीये की जरूरत नहीं होती है।

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