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भगवान को फूल चढ़ाते समय ….

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हम भगवान को प्रसन्न करने के लिए उनपर फूलों को चढ़ाते हैं। भगवान की पूजा कभी भी सूखे फूलों से नहीं होती। हम भगवान को फूल तो चढ़ाते हैं पर उसके नियम क्या हैं यह कभी ध्यान में नहीं रखते। इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है …

  • सूंघा हुआ या अंग में लगाया हुआ फूल दूषित होता है इन्हें न चढ़ाएं। भौंरे के सूंघने से फूल अपवित्र नहीं होता।
  • जो फूल अपवित्र बर्तन में रखा हो, अशुद्ध स्थान में हो, जिसे कीड़े खा गए हों, पृथ्वी पर गिर गया हो, पूरा खिला न हो, गंध रहित या बहुत तेज गंध वाले फूल किसी भी देवता पर नहीं चढ़ाना चाहिए।
  • कलियां चढ़ाना मना है पर यह नियम कमल के लिए लागू नहीं है। फूल को जल में डुबो कर न धोएं बल्कि उस पर पानी छिड़क लें

  • कदंब, केवड़ा, शिरीष, बकुल, बहेड़ा, कपास, सेमल, अनार, कुंद, जूही के फूल भी भगवान को नहीं चढ़ाने चाहिए।
  • जो फूल और पत्ते और जल बासी हो गए हों उन्हें पूजन में प्रयोग न करें। तुलसी पत्र ,गंगाजल और तीर्थों का जल कभी बासी नहीं होता
  • फूल चढ़ाते समय ध्यान रखें कि उल्टा न रहे। दूर्वा या तुलसीदल अपना मुख नीचे करके चढ़ाएं।
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