अक्षय नवमीः आंवले के पेड़ के नीचे बैठने और खाना खाने से दूर होंगे कष्ट

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अक्षय नवमी कार्तिक शुक्ल नवमी को कहते हैं। अक्षय नवमी के दिन ही द्वापर युग का प्रारम्भ माना जाता है। अक्षय नवमी को ही भगवान श्री कृष्ण ने कंस-वध से पहले तीन वन की परिक्रमा करके क्रान्ति का शंखनाद किया था। अक्षय नवमी के दिन भगवान कृष्ण की परिक्रमा परम्परा का निर्वहन करते हुए लोग आज भी  मथुरा वृन्दावन की परिक्रमा करते हैं। मथुरा-वृन्दावन एवं कार्तिक मास साक्षात राधा-दामोदर स्वरूप है। इसी मास में श्रीकृष्ण ने  नंद बाबा से गो-चारण की आज्ञा ली थी। इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठने और खाना खाने से कष्ट दूर हो जाते हैं। अक्षय नवमी को आंवला पूजन स्त्री जाति के लिए अखंड सौभाग्य और पेठा पूजन से घर में शांति, आयु एवं संतान वृद्धि होती है।

नवमी के दिन युगल उपासना करने से भक्त शान्ति, सद्भाव, सुख और वंश वृद्धि के साथ पुनर्जन्म के बंधन से मुक्ति प्राप्त करने का अधिकारी बनाता है। इस व्रत को करने से  व्रत, पूजन, तर्पण आदि का फल अक्षय हो जाता है। इस दिन स्नान के बाद आंवले के वृक्ष के नीचे पूर्व की ओर मुख करके  पेड़ की जड़ को दूध से सिंचित करें तथा कपूर की आरती करें फिर पेड़ के चारों ओर सूत लपेटते हुए 108 परिक्रमा करनी चाहिए। व्रत के साथ ही यह एक ऐसा पर्व है जिससे एक दिन के लिए ही सही, खुले वनप्रांतर में जाने को मिल जाता है। दरअसल इसका कारण यह है कि नियम के अनुसार इस दिन का भोजन आंवले के वृक्ष के नीचे पकना चाहिए और पूरे परिवार को वहीं भोजन करना चाहिए। ऐसा करना शुभ माना जाता है।

आंवले के वृक्ष के नीचे ही एक ब्राह्मण दंपति को भोजन कराएं तथा उन्हें, आंवला तथा दक्षिणा दे कर विदा करें तब स्वयं  भोजन करना चाहिए। इस दिन आंवले का दान सर्वोत्तम माना गया है। अपने भोजन में भी आंवला अवश्य रखें ।इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठने और खाना खाने से कष्ट दूर हो जाते हैं। अक्षय नवमी का शास्त्रों में वही महत्व बताया गया है जो वैशाख मास की तृतीया का है। शास्त्रों के अनुसार अक्षय नवमी के दिन किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता है। इस दिन जो भी शुभ कार्य जैसे दान, पूजा, भक्ति, सेवा किया जाता है उनका पुण्य कई-कई जन्म तक प्राप्त होता है। मान्यता है कि अक्षय नवमी के दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु एवं शिव जी का निवास होता है। इसलिए अक्षय नवमी के दिन प्रातः उठकर आंवले के वृक्ष के नीचे साफ-सफाई करनी चाहिए। आंवले के वृक्ष की पूजा दूध, फूल एवं धूप से करनी चाहिए।

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