आंवला नवमी पर भूमि दान से नष्ट होंगे पाप

आंवला नवमी को अक्षय नवमी भी कहते हैं। यह व्रत कार्तिक शुक्लपक्ष की नवमी को किया जाता है। कहते हैं कि मात्र इस व्रत को करने से व्रत-पूजन तर्पण आदि का फल स्वत: प्राप्त हो जाता है। इस दिन गौ, वस्त्राभूषण और भूमि दान देने से ब्रह्महत्या जैसे पाप भी नष्ट हो जाते हैं। व्रत के साथ ही यह एक ऐसा पर्व है जिससे एक दिन के लिए ही सही, खुले वनप्रांतर में जाने को मिल जाता है।

  • amlaदरअसल इसका कारण यह है कि नियम के अनुसार इस दिन का भोजन आंवले के वृक्ष के नीचे पकना चाहिए और पूरे परिवार को वहीं भोजन करना चाहिए। ऐसा करना शुभ माना जाता है।

इस दिन स्नान के बाद आंवले के वृक्ष का पूर्व की ओर मुख कर के पूजन करें। उसकी जड़ में दूध की धारा गिरा कर पेड़ के चारों ओर सूत लपेट कर घी का दीपक जलाएं तथा वृक्ष की 108 परिक्रमा करें। आंवले के वृक्ष के नीचे ही एक ब्राह्मण दंपति को भोजन कराएं तथा उन्हें व आंवला तथा दक्षिणा दे कर विदा करें तब स्वयं भोजन करना चाहिए। इस दिन आंवले का दान सर्वोत्तम माना गया है। स्वयं के भोजन में भी आंवला अवश्य रखें।

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