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हिमाचल में Cash का संकटः खाली रहे कई ATM, Tourist सहित स्थानीय लोगों को हुई परेशानी  

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शिमला। धर्मशाला, नगरोटा बगवां, बैजनाथ, ज्वाली, पालमपुर, नूरपुर सहित हमीरपुर, कुल्लू, चंबा व शिमला में भी बैंक ATM खाली रहे। 40 से 50 लाख प्रतिदिन की मांग वाले ATM में महज 10 से 15 लाख रुपए ही निकल पाए। शिमला में नकदी की कमी के कारण स्थानीय लोगों को नहीं बल्कि Tourist को भी असुविधा का सामना करना पड़ा। दिल्ली पर्यटक खन्ना ने कहा कि हम मालरोड पर चार ATM में गए, लेकिन इन मशीनों में कोई Cash नहीं था। शिमला के निवासी विजय चौहान ने कहा कि उन्होंने एसबीआई, इंडियन बैंक, पीएनबी से पैसे निकालने की  कोशिश की, लेकिन किसी भी मशीन से पैसे नहीं निकले। वहीं, शिमला में पंजाब नेशनल बैंक के सर्किल प्रमुख दीपक कुमार ने ATM में Cash की कमी होने की पुष्टि करते हुए कहा कि ग्राहकों को असुविधा हो रही है और नकदी की कमी है। आपूर्ति की कमी के कारण हमारे पास नकदी की समस्या है, लेकिन अगले 24 घंटों में समस्या का समाधान हो जाएगा, क्योंकि हमने नकदी के लिए अनुरोध किया है, उन्होंने कहा कि हमें नकदी की कमी का सही कारण नहीं पता है, लेकिन निश्चित रूप से कमी है।

गौर रहे कि प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में इस समय कैश को लेकर हाहाकार की स्थिति बनी हुई है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, झारखंड, महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश में ATM में Cash न होने की शिकायतें दिनभर आती रहीं। ATM और बैंकों में नगदी की कमी को सरकार ने अचानक बढ़ी मांग का नतीजा बताया। आर्थिक मामलों के सचिव एस.सी गर्ग ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस कर सरकार के खजाने में नगदी की कमी वाली खबरों का खंडन किया। गर्ग ने कहा कि सरकार पांच सौ के नोट की छपाई पांच गुना बढ़ा रही है। लेकिन साथ ही गर्ग  ने इस बात को स्वीकार भी किया कि बीते कुछ महीनों से 2000 रुपये के नए नोटों की सप्लाई बंद है। वहीं वित्त मंत्रालय ने दावा किया कि यह Cash संकट एक झटके में देशभर के ATM से हुई निकासी के चलते पैदा हुआ है।
सरकार के मुताबिक आम तौर पर एक महीने में 20 हजार करोड़ की करेंसी की खपत होती है। लेकिन अप्रैल के पहले 12-13 दिनों के दौरान लगभग 45 हजार करोड़ रुपये की निकासी अलग-अलग तरीकों से की जा चुकी है। केन्द्र सरकार ने पर्याप्त मात्रा में करेंसी होने का दावा करते हुए अगले 2 से 3 दिन में स्थिति को सामान्य कर लिए जाने की बात कही है। इस समय कैश संकट से सबसे ज्यादा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, मध्यप्रदेश और बिहार प्रभावित हैं।

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