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भगवान Raghunath मंदिर मामला : Maheshwar Singh बोले, सत्य की जीत हुई

पूर्व कांग्रेस सरकार ने मंदिर को कब्जे में लेने के लिए अधिग्रहण किया था। मौजूदा बीजेपी की सरकार ने पूर्व सरकार के अधिग्रहण को निरस्त किया।

गुड़िया प्रकरण : Zaidi समेत 9 पुलिस कर्मियों को राहत नहीं, अभी और रहना होगा Jail में

गुड़िया प्रकरण से संबंधित पुलिस कस्टडी में आरोपी सूरज की हत्या के मामले में गिरफ्तार पूर्व आईजी जैदी समेत सभी 9 पुलिस कर्मियों को दूर-दूर तक राहत के आसार नहीं है।

ये क्या! गिरा तो था पेड़ से, हाथ में बंदूक की गोली लगने से कैसे लगी चोट

पुलिस ने आईजीएमसी के डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर ठंडीधार निवासी प्रदीप के हाथ में बंदूक की गोली से चोट लगने का केस दर्ज किया है।

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‘Padmaavat’ के लिए Ranveer Singh को मिला Surprise, ट्विटर पर जताई खुशी

रणवीर को अमिताभ बच्चन की तरफ से प्यारा सा सरप्राइज मिला है, जिसको पाकर रणवीर फूले नहीं समा रहे उन्होंने तो यहां तक कहा कि उन्हे उनका अवार्ड मिल गया है।

धलूं खड्ड पर बना पुल जनता के हवाले, CM Jai Ram Thakur ने किया उद्घाटन

धर्मशाला। सीएम जयराम ठाकुर ने 1.88 करोड़ की लागत से तैयार धलूं खड्ड पर बने पुल को मंगलवार को जनता के हवाले कर दिया। सीएम जयराम ठाकुर ने कांगड़ा प्रवास के दूसरे दिन इस पुल का उद्घाटन किया। गौर रहे कि लंबे समय से नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र के तहत आते धंलू गांव के लिए यह पुल आवाजाही का अहम मार्ग है और पुल का उद्घाटन किया जाना था। इसके बाद सीएम जयराम नगरोट बगवां में कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। जाहिर है कि मंगलवार सुबह सीएम ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

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लाओस : यहां बिखरे पड़े हैं पत्थरों के हजारों जार

मनुष्य का इतिहास जितना पुराना है उसकी सामाजिक परंपरा में शायद अंत्येष्टि के तरीके भी उतने ही प्राचीन ढंग से हमारे सामने आते हैं। जब भी पुरातात्विक अन्वेषण हुए हैं एक नई परंपरा सामने आई है। इसी क्रम में लाओस के पठार पर एक लंबे एरिया में दूर तक फैले जार एक अलग तरह की अंत्येष्टि परंपरा का परिचय देते हैं। लाओस दक्षिण पूर्व एशिया में स्थित एक देश है। इसकी सीमाएं उत्तर पश्चिम में म्यान्मार और चीन से, पूर्व में कंबोडिया, दक्षिण में वियतनाम और पश्चिम में थाईलैंड से मिलती है। इसे हजार हाथियों की भूमि भी कहा जाता है। लाओस के पठार…

शुगर हुई है तो स्टीविया क्यों नहीं लेते …

स्टीविया शाकीय पौधा है। इसकी पत्तियों का उपयोग होता है। यह चीनी से तीन सौ गुना अधिक मीठा होता है, इसे पचाने से शरीर में एंजाइम नहीं होता और न ही ग्लूकोस की मात्रा बढ़ती है। इसकी मिठास के कारण इसे हनी प्लांट भी कहा जाता है। स्टीविया को मधुरगुणा के नाम से भी जाना जाता है। इसमें डायबिटीज को दूर करने के गुण होते हैं। यह चीनी का स्थान ले सकती है। यह शून्य कैलोरी स्वीटनर है और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है। इसे हर जगह चीनी के बदले इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे तैयार उत्पाद न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि दिल के रोग और मोटापे से…

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