बथुआ तो खाएं पर कम मात्रा में ….

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वैसे तो यह अपने आप उगने वाला साग है, जो खेतों में अन्य फसलों के साथ उग जाता है। इसका प्रयोग साग के तौर पर किया जाता हैं और उड़द की दाल के साथ भी पकाते हैं। इसका रायता या परांठे भी बनाए जाते हैं। मौसमी सब्जियों में यह काफी लोकप्रिय है। पर इतना ध्यान अवश्य रखें कि बथुए को हमेशा कम मात्रा में खाना चाहिए क्योंकि इसमें ऑक्जेलिक एसिड का लेवल बहुत ज्यादा होता है। इसे ज्यादा खाने से डायरिया भी हो सकता है।

वैसे बालों का ओरिजनल कलर बनाए रखने में बथुआ आंवले से कम गुणकारी नहीं है। इसमें विटामिन और खनिज तत्वों की मात्रा आंवले से ज्यादा होती है। इसमें आयरन, फॉस्फोरस और विटामिन ए और डी काफी मात्रा में पाए जाते हैं। खेतों में फसलों के साथ बहुतायत से पाया जाने वाला बथुआ बेहद गुणकारी है। पत्तेदार सब्जियों में इसकी अलग ही पहचान है। बथुआ कितने ही विटामिन्स और खनिजों से भरपूर है। बालों को वास्तविक रंग देने में यह आंवले को टक्कर देता है।

  • बथुए की पत्तियों को कच्चा चबाने से सांस की बदबू, पायरिया और दांतों से जुड़ी अन्य समस्याओं में फायदा होता है। 
  • कब्ज से राहत दिलाने में बथुआ बेहद कारगर है। गठिया, लकवा, गैस की समस्या में यह काफी फायदेमंद है। 
  • भूख में कमी आना, खाना देर से पचना, खट्टी डकार आना जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी बथुआ खाना फायदेमंद है।
  • बथुए को 4-5 नीम की पत्तियों के रस के साथ खाया जाए तो खून अंदर से शुद्ध हो जाता है, साथ ही ब्लड सर्कुलेशन भी ठीक रहता  है।
  • बच्चों को कुछ दिनों तक लगातार बथुआ खिलाया जाए तो उनके पेट के कीड़े मर जाते हैं।

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