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सावधान! आंखों की रोशनी चुरा लेता है ग्लूकोमा

Be Aware of The Glaucoma

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ग्लूकोमा अंधेपन का एक प्रमुख कारण है। समस्या यह है कि इसके शुरुआती लक्षण पकड़ में नहीं आते, जबकि इसका समय पर पता लग जाना और इलाज शुरू कर देना बेहद जरूरी है। आप जान भी नहीं पाते और यह बीमारी आपकी आंखों की रोशनी चुरा लेती है। प्रचलित भाषा में इसे काला मोतिया कहते हैं। इस रोग में दृष्टि को दिमाग तक ले जाने वाली नसें धीरे-धीरे नष्ट होती जाती हैं। इसका फिर सुधार नहीं हो पाता, इसलिए इसका वक्त रहते इलाज करा लेना बेहद जरूरी है।

एक बार यह बीमारी हो जाने के बाद ऑप्टिक नर्व को गंभीर नुकसान हो जाता है। फिर आप इलाज करते रहें यह कम ही ठीक होता है। इसके बाद अगर रोग बढ़ता ही रहे तो अंधेपन की नौबत आ सकती है। हां, अगर समय पर इलाज शुरू कर दिया जाए तो भारी नुकसान से बचा जा सकता है। ओपन एंगल ग्लूकोमा में आंख के तरल का प्रेशर धीरे-धीरे बढ़ता जाता है, वह भी इस तरह कि मरीज को अपनी बीमारी का एहसास तक नहीं हो पाता।आगे चलकर आंखों की रोशनी चली जाती है।
इसके विपरीत क्लोज्ड एंगल ग्लूकोमा में एक्चस ह्यूमर का प्रवाह अकस्मात ही रुक जाता है। अचानक एंगल्स बंद होने से तेज सिर दर्द, दिखाई देना बंद होना, आंखें लाल होना, उल्टी या चक्कर आने जैसी समस्याएं होती हैं। धीरे-धीरे एंगल्स पूरी तरह बंद हो जाते हैं। इससे हुआ नुकसान इलाज के बाद भी कभी ठीक नहीं होता। जरूरी है कि हर महीने आंखों की जांच करवाते रहें। जब भी इसके लक्षण महसूस हों तो नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लें। दवाएं लेते रहें, फिर भी लाभ न हो तो ऑपरेशन कराया जा सकता है। गौरतलब है कि डायबिटीज, हाई बीपी और दिल की बीमारी की वजह से भी ग्लूकोमा हो सकता है।

इसके अलावा 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को जिनका कोई पारिवारिक ग्लूकोमा का इतिहास रह चुका है उन्हें भी इसकी शिकायत की ज्यादा संभावना रहती है। ऐसे में तंबाकू, शराब, मसाले, चाय-कॉफी और कोल्डड्रिंक्स का सेवन कम करें। विटामिन सी लेना जरूरी है यानी खट्टे फल और पत्तेदार सब्जियां लें। नट्स और अन्य मेवे अनाज आहार शामिल करना बेहद आवश्यक है। अंडे, गाजर, दूध, ब्लूबेरी, चेरी, टमाटर का सेवन इस बीमारी में लाभदायक हो सकता है।

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