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सावधान ! कहीं आप भी तो नहीं हैं PCOS की शिकार

सही समय पर निदान न करने से बढ़ सकती है बीमारी

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आपमें से अधिकतर लड़कियों व महिलाओं को पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) के बारे में शायद जानकारी न हो लेकिन अध्ययन के मुताबिक, भारत में हर पांच में से एक महिला PCOS से प्रभावित होती है। लड़कियों और महिलाओं के बीच PCOS एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसके लिए सावधानीपूर्वक मूल्यांकन, समय पर हस्तक्षेप और उचित उपचार की आवश्यकता होती है। सही समय पर निदान न होने पर PCOS महिलाओं को अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं जैसे उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, चिंता और अवसाद, स्लीप एप्निया, दिल का दौरा, मधुमेह और एंडोमेट्रियल, यूट्रस व स्तन कैंसर के लिए कमजोर बना सकता है।

PCOS हार्मोन्स के बैलेंस न होने का नतीजा होती है। PCOS से ग्रस्त महिलाओं की ओवरी (अंडाशय) पुरुष हार्मोन टेस्टोस्टेरोन का महिलाओं के हार्मोन एस्ट्रोजन की तुलना में अधिक उत्पादन करना शुरू कर देती है। इससे महिलाओं में पीरियड्स और गर्भधारण से जुड़ी समस्याएं पैदा हो सकती हैं साथ ही त्वचा पर बाल आना, चेहरे पर बहुत अधिक बालों का आना मुंहासे और गंजेपन जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।

क्या हैं PCOS के लक्षण :

वजन बढ़ना, थकान, अवांछित बाल उगना, बाल पतले होना, बांझपन, मुंहासे, पैल्विक पेन, सिर दर्द, नींद की समस्याएं और मूड स्विंग आदि PCOS के लक्षण हैं। ज्यादातर लक्षण युवावस्था के तुरंत बाद शुरू होते हैं और वे देर से किशोर और प्रारंभिक वयस्कता में भी विकसित हो सकते हैं।
पीसीओएस ठीक नहीं हो सकता, लेकिन इसे शरीर का वजन पांच से 10 प्रतिशत तक कम कर और जीवनशैली में बदलाव लाकर प्रबंधित किया जा सकता है। साथ ही सक्रिय दिनचर्या बनाए रखना और स्वस्थ भोजन करना भी महत्वपूर्ण है। बदले में यह मासिक धर्म चक्र को नियमित करने और ब्‍लड शुगर के स्तर को कम करने में मदद करेगा।
डाइट और स्वास्थ्य का रखें ध्यान :
पीसीओएस वाली महिलाओं को अपनी डाइट में ब्रोकोली, फूलगोभी और पालक जैसे उच्च फाइबर वाले खाद्य पदार्थों का उपभोग करना चाहिए। इसके अलावा नट्स जैसे- बादाम, अखरोट, ओमेगा और फैटी एसिड में समृद्ध खाद्य पदार्थ खाएं। तीन बार अधिक भोजन करने के बजाय पांच बार कम मात्रा में भोजन करें, क्योंकि यह मैटाबोलिज्म को ठीक रखेगा। वजन का सही स्तर बनाए रखें।
इसके अलावा सप्ताह में पांच दिन हर रोज लगभग 30 मिनट के लिए शारीरिक व्यायाम करें। योग और ध्यान जैसी तकनीकों के माध्यम से तनाव से बचें। धूम्रपान और शराब छोड़ें, क्योंकि यह पीसीओएस वाले लक्षणों में वृद्धि कर सकते हैं।
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