एक बार जो यहां गया वापस नहीं लौटा 

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जब भी किसी रहस्यमयी जगह की बात होती है तो बरमूडा का ज़िक्र होना लाज़िमी है। यह दुनिया का सबसे बड़ा रहस्य माना जाता है जिसे आज तक कोई भी सुलझा नहीं पाया। न जाने कितने ही शिप और हवाई जहाजों को यह दैत्य रूपी सागर अपने आप में समा चुका है। दैत्य रूपी इसलिए भी, क्योंकि एक बार जो इसकी सीमा में प्रवेश कर जाता है, वह कभी लौट कर नहीं आता। अटलांटिक महासागर में बरमूडा ट्रायंगल एक ऐसा हिस्सा है, जिसकी गुत्थी आज तक कोई नहीं सुलझा सका है। लेकिन इतने साल बाद यहां से एक अच्छी खबर आई है।

एक जहाज़ 90 साल बाद इस रहस्यमयी ट्रायएंगल से लौट आया है। यह भुतहा त्रिकोण बरमूडा, मयामी, फ्लोरिडा और सेन जुआनस से मिलकर बनता है। एक दिन क्यूबा के तटरक्षक ने घोषणा की, कि उन्हें अपने द्वीप क्षेत्र में एक लावारिस जहाज मिला है जिस पर कोई नहीं था। अविश्वसनीय रूप से माना जा रहा है कि यह जहाज कोटोपैक्सी है। जो कि एक बड़ा स्टीमर है। यह दिसंबर 1925 में लापता हो गया था। तब से अब तक इस जहाज की कोई खोज खबर नहीं मिली थी। लेकिन इस बरामदगी ने लोगों के जेहन में बरमूडा ट्रायएंगल की याद ताजा कर दी है। क्यूबा के तटरक्षकों ने पहली बार इस जहाज को 16 मई को पश्चिमी हवाना के प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्र में देखा था।

उन्होंने जहाज के चालक दल से सम्पर्क करने के काफी प्रयास करने के बाद भी जब कोई उत्तर न मिला तो तीन गश्ती नौकाओं को उसे घेरने भेजा गया। जब वे लोग इस जहाज पर पहुंचे तो वो देखकर हैरान हो गए कि यह लगभग 100 साल पुराना है, जिसका नाम कोटोपैक्सी है। यह वह नाम था जो बरमूडा में गुम हो चुके जहाजों की सीरीज़ में शामिल था। इस जहाज़ पर कोई नहीं मिला। यह जहाज़ 1925 में लापता हो गया था। इसमें कुछ मिला तो, वह थी कैप्टन की लॉग-बुक जिससे पता चला कि ये क्लिंचफील्ड नेवीगेशन कंपनी का जहाज़ था। इस जहाज़ के ओनर से भी बात की गई, लेकिन कुछ पता नहीं चल सका कि आखिर 90 साल पहले हुआ क्या था।

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