भुंतर नगर पंचायत के पूर्व पार्षदों का आरोप, DC Kullu के आदेशों को नजरअंदाज कर रहे अधिकारी

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कुल्लू। भुंतर नगर पंचायत में अवैध तरीके से बनाई गई दुकानों के मामले में पूर्व पार्षदों ने नगर पंचायत के अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पूर्व पार्षदों का आरोप है कि नगर पंचायत के अधिकारी डीसी कुल्लू कोर्ट के आदेशों पर ही अमल नहीं कर रहे हैं। इस बारे वह गंभीर नहीं दिख रहे हैं। बता दें कि 14 दिसंबर, 2017 को भुंतर नगर पंचायत द्वारा अवैध तरीके से बनाई गई 4 दुकानों को गिराने के आदेश जारी किए हैं। आदेश में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि अवैध दुकानों को 15 दिनों के भीतर तोड़ा जाए। लेकिन, इन आदेशों के करीब एक माह बीत जाने के बाद भी दुकानें नहीं तोड़ी गई हैं और न ही नगर पंचायत भुंतर के अधिकारियों ने इसको लेकर कोई उचित कार्रवाई अमल में लाई है। 

डीसी ने दिए थे अवैध रूप से बनाई चार दुकानें तोड़ने के आदेश

पूर्व पार्षद रमा देवी, गीता शर्मा और जस्पाल व सोनी शर्मा ने प्रेसवार्ता में बताया कि डीसी कुल्लू से ये दूसरी बार आदेश हुए हैं। लेकिन, भुंतर नगर पंचायत के अधिकारी इसको लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामला 2015 का है, जब नगर पंचायत भुंतर के चंद पदाधिकारियों ने आपस में मिलकर कुछ दुकानें अवैध तरीके से बनाकर उन्हें अपने चहेतों को बांट दिया था और उस दौरान पार्षदों ने डीसी के समक्ष अवैध निर्माण और आवंटन का मामला उठाया था और तत्कालीन डीसी कुल्लू राकेश कंवर को लिखित में शिकायत की थी। डीसी ने एसडीएम कुल्लू को जांच के आदेश दिए थे और एसडीएम कुल्लू ने जांच के दौरान पाया था कि इन दुकानों का निर्माण अवैध तरीके से किया गया है।

उसके बाद उस दौरान डीसी राकेश कंवर ने भी दुकानें तोड़ने के आदेश दिए थे। लेकिन, उस दौरान बीओडी से दूसरे पक्ष को कुछ राहत मिली थी। लेकिन, जब हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को फिर से इस मामले पर कार्रवाई करने के आदेश दिए तो डीसी कुल्लू की अदालत ने 14 दिसंबर को फिर से इन दुकानों को गिराने के आदेश दिए हैं। लेकिन, भुंतर नपं के अधिकारी इन आदेशों को धरातल पर नहीं उतार रहे हैं। पूर्व पार्षदों का आरोप है कि 14 दिसंबर से लेकर दुकानों को तोड़ने के लिए दिया गया 15 दिन का समय बीत चुका है। लेकिन, नगर पंचायत भुंतर के अधिकारी इन आदेशों पर कोई अमल नहीं कर पाई है। इन आदेशों को दिए हुए एक महीना बीत चुका है। लिहाजा अब जिला प्रशासन को ऐसे ढीली कार्यप्रणाली वाले अधिकारियों पर कार्रवाई अमल में लानी चाहिए।

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