चेन्नकेशव मंदिरः एक बार जरूर जाना चाहेंगे आप

0

दक्षिण भारत में एक से बढ़कर एक मंदिर है। इनमें से एक है चिन्नकेशव मंदिर जो कर्नाटक के बेलूर (बेलुरु] में स्थित है। होयसल नरेश विष्णुवर्धन द्वारा 1117 ई. में बनवाया चेन्नकेशव का मंदिर बेलूर की ख्याति का कारण भी है। यह मंदिर स्थापत्य एवं मूर्तिकला की दृष्टि से भारत के सर्वोत्तम मंदिरों में शुमार है। यह 178 फीट लंबा और 156 फीट चौड़ा है। मंदिर का पूर्वी प्रवेशद्वार सर्वश्रेष्ठ है, इस में चालीस झरोखे बने हैं। जिनमें से कुछ के पर्दे जालीदार हैं और कुछ में ज्यामितीय आकृतियां बनी हैं।

मंदिर की संरचना दक्षिण भारत के अनेक मंदिरों की भांति नक्षत्राकार है। स्तम्भों के शीर्षाधार नारी मूर्तियों के रूप में निर्मित हैं। ये नारी मूर्तियां मदनिका नाम से प्रसिद्ध हैं। गिनती में ये 38 हैं, 34 बाहर और शेष अन्दर। ये लगभग 2 फीट ऊंची हैं और इन पर उत्कृष्ट प्रकार का श्वेत पॉलिश किया गया है, जिसके कारण ये मोम की बनी हुई जान पड़ती हैं। मूर्तियां परिधान रहित हैं, केवल उनका सूक्ष्म अलंकरण ही उनका आवरण है। मूर्तियों की भिन्न-भिन्न भाव-भंगिमाएं मोहक हैं। एक स्त्री अपनी हथेली पर बैठे शुक को बोलना सिखा रही है। दूसरी धनुष संधान करती हुई प्रदर्शित है। तीसरी बांसुरी बजा रही है, चौथी केश-प्रसाधन में व्यस्त है, पांचवी सद्यः स्नाता नायिका अपने बालों को सुखा रही है, छठी अपने पति को तांबूल प्रदान कर रही है और सातवीं नृत्य की विशिष्ट मुद्रा में है।

इन कृतियों के अतिरिक्त बंदर से अपने वस्त्रों को बचाती हुई युवती, वाद्ययंत्र बजाती हुई नवयौवना तथा प्रणय सन्देश लिखती हुई विरहिणी, ये सभी बहुत ही स्वाभाविक तथा भावपूर्ण हैं। एक सुंदरी बाला है, जो अपने परिधान में छिपे हुए बिच्छू को हटाने के लिए अपने कपड़े झटक रही है। उसकी भयभीत मुद्रा का अंकन मूर्तिकार ने बड़े ही कौशल से किया है। उसकी दाहिनी भौंह बड़े बांके रूप में ऊपर की ओर उठ गई है और डर से उसके समस्त शरीर में तनाव स्पष्ट है। मंदिर के भीतर की शीर्षाधार मूर्तियों में देवी सरस्वती का उत्कृष्ट मूर्तिचित्र देखते ही बनता है।वास्तव में होयसल वास्तु विशारदों ने इन कलाकृतियोंमें मूर्तिशिल्प को चरमावस्था पर पहुंचा कर उन्हें संसार की सर्वश्रेष्ठ शिल्पकृतियां बना दिया है।

You might also like More from author

Leave A Reply