छोटी काशी में बसते हैं शिव-पार्वती

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ब्यास नदी के तट पर बसा है मंडी शहर

वी कुमार/मंडी। प्रदेश का एक शहर ऐसा भी है जिसे छोटी काशी के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि इस शहर में बहुत सी समानताएं काशी की तरह हैं और यही कारण है कि इसे छोटी काशी का नाम दिया गया है। देवभूमि हिमाचल के केंद्र में बसा मंडी शहर अपनी प्राचीनता और मंदिरों की अधिक संख्या के कारण छोटी काशी के नाम से जाना जाता है। उत्तर प्रदेश की काशी जहां गंगा के तट पर बसी है वहीं यह शहर ब्यास नदी के तट पर बसा हुआ है। 

जितने मंदिर काशी में हैं उससे अधिक मंदिर यहां पर मौजूद हैं, लेकिन यहां मंदिरों का निर्माण बाद में हुआ और अधिकतर मंदिर राजाओं के शासनकाल में बने। जिस प्रकार की रौनक काशी में गंगा के घाटों पर रहती है वैसी ही रौनक कभी छोटी काशी में ब्यास नदी के घाटों पर भी रहती थी लेकिन बदलते दौर के साथ यह रौनक गायब हो गई। सांसद राम स्वरूप शर्मा के प्रयासों से यहां पर गंगा आरती की तर्ज पर ब्यास आरती की शुरुआत की गई और इस परंपरा को अब तक निरंतर जारी रखा गया है। जिस दिन ब्यास आरती होती है उस दिन घाटों पर कुछ रौनक नजर आ जाती है। मंदिरों की अगर बात की जाए तो छोटी काशी मंडी में भगवान शिव के मंदिर सबसे ज्यादा हैं।

यही कारण है कि यहां भगवान शिव और माता पार्वती का निवास माना जाता है। यहां बाबा भूतनाथ, अर्धनारीश्वर, पंचवक्त्र, महामृत्युंजय, एकादश रूद्र, नीलकंठ, त्रिलोकीनाथ, ताम्रपति और शिव रुद्र जैसे मंदिर प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा यहां सिद्ध गणपति, सिद्धकाली, टारना माता, भीमाकाली, खुआ रानी और चामुंडा माता के मंदिर भी मौजूद हैं। खास बात यह है कि यहां सिक्खों के दसवें गुरू गोबिंद सिंह जी का ऐतिहासिक गुरुद्वारा भी है। वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण कुमार नूतन बताते हैं कि मंडी नगर मांडव्य ऋषि की तपोस्थली रही है। यहां कभी गंधर्वों का राज होता था। मंडी के राजाओं ने यहां पर प्राचीन कला के मंदिरों का निर्माण करवाया और इसे काशी जैसा स्वरूप देने की कोशिश की।

हालांकि बाद में मांडव्य नगरी व्यापारिक दृष्टि से प्रसिद्ध हुई और इसे मंडी नाम दिया गया और मंदिरों की बहुतायत के कारण इसे छोटी काशी कहा गया। यहां पर मंदिरों की अधिकता होने के कारण अकसर लोग इनका भ्रमण करने यहां आते हैं। इन मंदिरों को जोड़ने की योजना भी बनाई जा रही है और फुटपाथ ऑफ गॉड के नाम से एक पूरे ट्रैक का निर्माण करने की सोची गई है ताकि लोग यहां आएं तो एक ही मार्ग पर चलकर सभी मंदिरों के दर्शन कर सकें। यहां के लोग खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें छोटी काशी में रहने का मौका मिला है और यहां के प्राचीन मंदिरों को रोजाना देखने का अवसर प्राप्त होता है। छोटी काशी की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के प्रधानमंत्री भी यहां की देव संस्कृति से भली भांति परिचित हैं। जब कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंडी आते हैं तो इस बात का जिक्र जरूर करते हैं कि ’’बड़ी काशी का सांसद छोटी काशी में आया है।’’ छोटी काशी के नाम से विख्यात हो चुके मंडी शहर ने न सिर्फ प्रदेश और देश में बल्कि विश्व में अपनी एक अलग पहचान बनाई है और यह पहचान लगातार बरकरार है।

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