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चुराह में फटा बादल, चंबा-तीसा मार्ग पर बालू के पास सड़क बही

चुराह, सलूणी, सालवां, भलेई क्षेत्रों का संपर्क चंबा मुख्यालय से कटा

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चंबा। जिला में मॉनसून की दस्तक आफत लेकर आई है। पहली जोरदार बारिश से चंबा जिला में कई मार्ग बंद हो गए हैं। वहीं, चुराह क्षेत्र में बादल फटने से 15 भैंसें बह गई हैं। चुराह, सलूणी, सालवां तथा भलेई क्षेत्रों का संपर्क चंबा मुख्यालय से पूरी तरह से कट गया है। जबकि, जगह-जगह भूस्खलन होने से पांगी का संपर्क भी शेष जिला से पूरी तरह कट गया है। बता दें कि जिला में भारी बारिश व रावी के उफान पर होने के कारण चंबा-तीसा मार्ग पर बालू के समीप राठ घार में सड़क का अधिकतर हिस्सा बह गया।

बुधवार को बारिश के चलते जहां लोक निर्माण विभाग को 55 लाख रुपये की चपत लगी तो वहीं वीरवार को पूरा दिन मूसलाधार बारिश के चलते नुकसान का आंकड़ा एक करोड़ के पार हो गया। नुकसान की रिपोर्ट विभाग तैयार कर रहा है। जिसे उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा। अधिशाषी अभियंता लोनिवि मंडल चंबा जीत सिंह ने बताया कि चंबा में भारी बारिश के कारण वीरवार को चंबा-तीसा मार्ग पर राठ घार का अधिकतर हिस्सा बह गया है। बारिश से बंद हुए अधिकतर मार्गों को बहाल करवा दिया गया है। इस बारिश से सड़कों को काफी नुकसान हुआ है, जिसकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

बादल फटने से करीब 15 भैंसें बह गईं

वहीं, उपमंडल चुराह में बादल फटने से करीब 15 भैंसें बह गईं। ग्राम पंचायत टेपा के शकराणी नामक स्थान पर गुज्जर समुदाय के लोग अपने मवेशियों के साथ बुधवार रात को आराम कर रहे थे। इस दौरान अचानक मौसम खराब होने लगा। अचानक तेज बारिश के साथ शकराणी के ऊपरी हिस्से में बादल फट गया। जिस स्थान पर मवेशी आराम कर रहे थे, वहां पर देखते ही देखते काफी जलस्तर बढ़ गया।

गुज्जर समुदाय के लोग समय की नजाकत को देखते हुए वहां से भाग गए। स्थानीय पंचायत प्रधान लता देवी व पूर्व प्रधान ध्यान सिंह ने मौके का जायजा लिया। इस दौरान पाया कि बुधवार रात को बादल फटने से रोशन, लालसैन, सवारू, मखन, कला, जुरी व अन्य गुज्जरों की करीब 15 भैंसे बह गई हैं। ऐसे में लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में अब प्रभावित प्रशासन की ओर सहायता की आस लगाए बैठे हैं, ताकि उन्हें कुछ हद तक राहत मिल सके।

प्रधान ग्राम पंचायत टेपा लता देवी का कहना है कि सूचना मिलते ही घटनास्थल का जायजा लिया गया। पंचायत प्रशासन से प्रभावित लोगों की सहायता की मांग करेगी। तहसीलदार चुराह सरताज सिंह का कहना है कि घटना की जानकारी मिली है। क्षेत्र के सबंधित पटवारी को मौका करने के आदेश दिए गए हैं। मौका रिपोर्ट आने के बाद प्रभावितों की हरसंभव सहायता की जाएगी, ताकि प्रभावितों को राहत मिल सके।

यह मार्ग भी रहे बंद

चंबा हेलीपैड के निचली तरफ सड़क पर भी पत्थरों के गिरने का क्रम जारी रहा, जिस कारण वाहनों को दूसरी तरफ से चंबा पहुंचना पड़ा। इस मार्ग पर अब वाहनों की आवाजाही खतरे से खाली नहीं है। बारिश का क्रम इसी तरह जारी रहा तो सड़क को ओर नुकसान पहुंच सकता है। बारिश के चलते परेल कोहलड़ी, चंबा-साहो, चंबा जुम्महार मार्ग भी भू-स्खलन के चलते कुछ घंटों तक बाधित रहे, जिसे बाद में लोक निर्माण विभाग ने खोल दिया है।

चंबा-साहो मार्ग पर मछराली माता मंदिर के पास फिर से भू-स्खलन हो गया। इसके चलते मार्ग फिर वाहनों की आवाजाही के लिए ठप पड़ गई। भारी बारिश के चलते बालू से सुल्तानपुर, बालू से सरोल, करियां से मैहला में पहाड़ी से पत्थर गिर रहे हैं। इस मार्ग से आवाजाही करने वाले लोगों को सावधान रहने की सलाह प्रशासन ने दी है।

अलर्ट! लारजी और पंडोह डैम से छोड़ा गया पानी

मंडी। बीती रात से हिमाचल प्रदेश में हो रही बारिश के कारण नदी नालों के जलस्तर में भारी बढ़ोतरी हो गई है। इसी कारण प्रदेश में बने बांधों के जलस्तर में भी भारी इजाफा हो गया है। मंडी जिला के तहत आने वाले पंडोह और लारजी बांधों में जलस्तर बढ़ने के कारण यहां से भारी मात्रा में पानी ब्यास नदी में छोड़ा जा रहा है। पानी छोड़ने का क्रम आज सुबह से शुरू हो गया है। लारजी बांध के अधिशाषी अभियंता सुनील कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि बांध का जलस्तर बढ़ने के कारण दो गेट खोले गए हैं, जिसमें से 350 क्यूसेक पानी ब्यास नदी में छोड़ा जा रहा है।

पंडोह बांध के जलस्तर में भी भारी ईजाफा हो गया जिसके चलते वहां से भी पानी ब्यास नदी में छोड़ा जा रहा है। बीबीएमबी के कार्यकारी अधिशाषी अभियंता राजेश हांडा ने बताया कि पंडोह बांध के दो गेट खोले गए हैं और यहां से 14000 क्वीसिक मीटर पानी ब्यास नदी में छोड़ा जा रहा है।

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