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सेना के लिए 27 हजार करोड़ रुपए की मिसाइल खरीद का मामला विवादों में

Competitors targets russian supplier for 27 thousand crore missile deal

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नई दिल्ली। भारतीय सेना के लिए रूसी कंपनी से 27 हजार करोड़ रुपए की एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइलों की खरीदी का मामला विवादों में उलझ गया है। इस सौदे में शामिल रहीं कई कंपनियों ने रक्षा मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया है कि तकनीकी रूप से कमजोर होने के बावजूद इन मिसाइलों को हरी झंडी दी गई है, जबकि ट्रायल में ये मिसाइलें नाकाम रहीं। भारतीय सेना ने इस साल जनवरी में मिसाइल को ओके किया है। इस कॉन्ट्रैक्ट के लिए कल का दिन खासा अहम होगा, जब रक्षा मंत्रालय इसके लिए कमर्शियल बिड्स को खोलेगा।

आसमान में उड़ते विमानों को इस मिसाइल के जरिए मार गिराया जा सकता है। इन्हें कंधे पर रखकर दागा जा सकता है। इनकी खरीदी का प्रस्ताव केंद्र की पिछली यूपीए सरकार के दौरान किया गया था। इस डील में  फ्रांसीसी, स्वीडिश और रूसी कंपनियां दावेदार थीं। अभी सेना आईजीएलए एम मिसाइल सिस्टम यूज कर रही है। लेकिन हवा में कम दूरी के टारगेट को मार गिराने में उपयोगिता को देखते हुए आईजीएलए एस मिसाइलों को खरीदने की बात उठी।

लेकिन जिस रूसी कंपनी से सेना के लिए 27 हजार करोड़ रुपए की मिसाइलें खरीदने का प्रस्ताव है, उसकी मिसाइल रेगिस्तानी इलाके में टारगेट को मार गिराने में नाकाम रही थी।बताया जाता है कि रूसी कंपनी ने ट्रायल्स के दौरान आईजीएलए एस की साइट्स में ऑप्टिक्स और सेंसर में बदलाव किया था, जो सिर्फ मामूली बदलाव करने की इजाजत देने वाले नियमों का उल्लंघन है। साथ ही, रूसी पक्ष दो बार ट्रायल्स के लिए नहीं आया था और यह भी नियम के खिलाफ है। ईटी के भेजे गए विस्तृत मेल का तीनों कंपनियों और रक्षा मंत्रालय की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। हालांकि, सेना के पास बजट की कमी को देखते हुए अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि वह इस भारी भरकम डील के लिए जरूरी रकम को कैसे जुटाएगी।

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