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कॉस्मिक कांश्सनेस देती है भविष्य के संकेत

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ऐसी चेतना हर किसी के पास नहीं होती पर जिनके भाग्य में यह कांश्सनेस आ जाती है वह औरों से अलग और विशिष्ट हो जाता है,क्योंकि तब वह भविष्य देखने में सक्षम हो जाता है। आप इसे दिवास्वप्न कहें या ल्यूसिड ड्रीम, पर यह जीवन में आने वाली घटनाओं के संकेत दे देता है। यही नहीं ऐसा एक बार भी महसूस करने वालों के जीवन में काफी बदलाव आ जाता है। आधुनिक मनोवैज्ञानिकों के अनुसार सोते समय की चेतना की अनुभूतियों को स्वप्न कहते हैं। स्वप्न के अनुभव की तुलना मृगतृष्णा के अनुभवों से की गई है। यह एक प्रकार का विभ्रम है।
स्वप्न की कुछ समानता दिवास्वप्न से की जा सकती है, परंतु दिवास्वप्न में विशेष प्रकार के अनुभव करनेवाला व्यक्ति जानता है कि वह अमुक प्रकार का अनुभव कर रहा है। स्वप्न अवस्था में 99.9 फीसदी अनुभवकर्ता नहीं जानते कि वे स्वप्न देख रहे हैं, लेकिन इस दुनिया में कुछ ऐसे बुद्धिजीवी लोग हैं, जिनका दिमाग क्षमता से अधिक सोचने लगता  है। दिवास्वप्न अकसर भविष्य का संकेत दे देते हैं। ऐसी घटना किसी व्यक्ति के साथ होना किसी चमत्कार से कम नहीं है। स्वप्न की घटनाएं वर्तमान काल से  जबकि दिवास्वप्न की घटनाएं भूतकाल तथा भविष्यकाल से संबंध रखती हैं।  ऐसे अनुभव हमारी अर्द्धचेतना के दौरान आते हैं और इनमें जाति, रंग या सभ्यता का कोई भेदभाव नहीं होता।  जरूरी नहीं है कि ये अनुभूतियां धार्मिक ही हों या फिर धार्मिक व्यक्तियों के लिए ही निर्धारित हों ।
दरअसल यह कुदरत का करिश्मा है जो हर किसी के जीवन में संभव हो सकता है। इसमें समय सीमा या स्थान का विभाजन नहीं होता। हां, ये अनुभूतियां कुछ सेकेंड ले कर दस मिनट तक की हो सकती हैं। जब भी ऐसा होता है तो महसूस करने वाले को लगता है कि वह किसी सुपीरियर पॉवर की जकड़ में आ गया है। यह शारीरिक चेतना से अलग की अनुभूति है जिसे साधारण शब्दों में शरीर से बाहर की अनुभूति कहा जा सकता है। विद्वानों ने इसे कॉस्मिक कांश्सनेस का नाम दिया है। पाया गया है कि ऐसे समय सांस लेने की रफ्तार धीमी हो जाती है तथा  नाड़ी की गति भी धीमी होती है। मस्तिष्क की गतिविधियां हल्की होती हैं और शारीरिक चेतनता की अनुभूति नहीं रहती। ऐसे अनुभव छोटे हो या बड़े, पर इनके बाद व्यक्ति के जीवन में बदलाव आते देखा गया है।

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