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धर्मशाला मामलाः अधिकारियों पर तल्ख हाईकोर्ट, प्रधान सचिव से मांगा जवाब

पूछा कोर एरिया को मिक्स लैंड यूज एरिया में क्यों बदला

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शिमला। हाईकोर्ट ने प्रधान सचिव टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को आदेश दिए हैं कि वह अपने शपथ पत्र के माध्यम से यह बताएं कि उन्होंने धर्मशाला में कोर एरिया को मिक्स लैंड यूज एरिया में क्यों तबदील किया। इसके अलावा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने प्रधान सचिव को यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि धर्मशाला में इस बाबत निर्णय लेने के दौरान क्या इन तथ्यों को भी ध्यान में रखा गया था कि यह क्षेत्र भूकंप का केंद्र बिंदू है। इस बाबत 2 सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दाखिल करने के आदेश जारी किए हैं।

न्यायालय ने निदेशक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग व आयुक्त नगर निगम धर्मशाला को आदेश दिए हैं कि वह उन सभी कनिष्ठ अभियंताओं से ऊपर तक के दर्जे के सभी अधिकारियों का ब्यौरा दें, जिन्होंने नगर निगम परिधि धर्मशाला में वर्ष 2010 से आज तक कार्य किया है। उनके नगर निगम में कार्यकाल का ब्यौरा भी मांगा गया है। हाईकोर्ट ने खेद जताया कि कोर्ट के आदेशों की अनुपालना करने में अधिकारियों का रवैया उदासीन है, इसका क्या कारण है। इसके बारे में आज तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। कोर्ट ने चेताया कि अगर न्यायालय के आदेशों की अनुपालना सुनिश्चित नहीं की जाती है तो संबंधित अधिकारियों का वेतन रोकने बाबत आदेश जारी किए जाएंगे।

खोखली हो गई पेड़ों की जड़ें, गिरने शुरू

न्यायालय द्वारा नियुक्त लोकल कमिश्नर देवेन खन्ना ने न्यायालय को बताया कि न केवल लोनिवि द्वारा सड़क बनाने के कारण धर्मशाला में पेड़ों को काटे जाने का डर है, बल्कि उस क्षेत्र में कुछ निजी लोग निर्माण की गतिविधियां जारी रखे हुए हैं, जो पेड़ों को कभी भी बिना इजाजत काट देते हैं। न्यायालय के ध्यान में यह भी तथ्य लाया गया कि जिन लोगों को नगर निगम द्वारा पेड़ों को गिराने की अनुमति नहीं दी गई थी उन लोगों ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया है, जिसकी वजह से पेड़ों की जड़ें खोखली हो गई है और पेड़ गिरने शुरू हो गए हैं।

उस क्षेत्र में निर्माण गतिविधि बिल्कुल न हो जहां पर लगें हों पेड़

न्यायालय ने नगर निगम धर्मशाला के आयुक्त को आदेश दिए हैं कि वह यह सुनिश्चित करें कि उस क्षेत्र में निर्माण गतिविधि बिल्कुल न हो जहां पर पेड़ लगे हों। उन्हें कोर्ट की अनुमति के बिना निर्माण कार्य करने की इजाजत न दी जाए। न्यायालय को प्रदेश महाधिवक्ता की ओर से यह बताया गया कि लोकल कमिश्नर की रिपोर्ट के आधार पर 31 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से न्यायालय को बताया गया कि 70 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिन्होंने निर्माण कार्य के दौरान पर्यावरण को सुरक्षित करने के लिए बनाए गए अधिनियम व नियमों का उल्लंघन किया है। 40 लोगों के बिजली व पानी के कनेक्शन काट दिए गए हैं।

शीघ्र हो लंबित मामलों का निपटारा
न्यायालय ने खेद जताया कि राज्य सरकार द्वारा धर्मशाला नगर निगम को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जाना था। मगर धर्मशाला में यूं पेड़ों का काटा जाना पर्यावरण के लिए बहुत बड़ा खतरा बना हुआ है और नगर निगम द्वारा अवैध तरीके से हो रहे कटान पर रोक लगाने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाया गया। उच्च न्यायालय ने जिला न्यायाधीश कांगड़ा स्थित धर्मशाला को यह सुनिश्चित करने के आदेश दिए कि जितने भी पानी व बिजली के कनेक्शन को काटे जाने से संबंधित मामले विभिन्न न्यायालयों में लंबित पड़े हैं, कोशिश की जाए कि उनका निपटारा शीघ्र हो, ताकि हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेशों की अनुपालना करने में किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न न हो। मामले पर सुनवाई 30 जुलाई को होगी।

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