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कोटरोपी में क्या फिर से बड़े हादसे के इंतजार में है प्रशासन!

बरसात में पानी की निकासी के लिए नहीं उठाए जा रहे ठोस कदम

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मंडी। हादसों के बाद भी अगर कोई नहीं संभला तो उसे नादान कहेंगे। यहां तो कई लोगों की जान चली गई और बहुत सारे लोगों की दाव पर है। बात करते हैं हिमाचल प्रदेश के इतिहास के सबसे बड़े भूस्खलन की। हम सभी को तो याद है लेकिन लगता है प्रशासन भूल गया है, तभी तो आपदा से निपटने के कोई पुख्ता इंतजाम तक नहीं कर पाया। 12 और 13 अगस्त 2017 की रात को मंडी जिला के पधर उपमंडल के तहत कोटरोपी गांव के पास पहाड़ी का एक बहुत बड़ा हिस्सा जमींदोज हो गया था और इसकी चपेट में सड़क से गुजर रही एचआरटीसी की दो बसें और कुछ अन्य वाहन आए थे। इस पूरे हादसे में 48 लोगों की मौत हुई थी, जिसमें से दो शव अभी तक भी बरामद नहीं हो पाए हैं।

क्या मात्र तीन फीट के पाइप से होगी भारी भरकम पानी की निकासी

बरसात के मौसम में हुए इस भीषण भूस्खलन के बाद अब एक बार फिर बरसात का मौसम नजदीक आते ही धड़कने तेज होने लग गई हैं। लेकिन बड़ा सवाल की आखिर एक वर्ष होने को हैं और इतने बड़े हादसे से प्रशासन ने क्या सबक लिया। कोटरोपी जाकर देखा जाए तो ऐसा कतई नहीं लगता कि हादसे के बाद कोई सबक लिया गया हो। बरसात का मौसम आने को है और यहां पर अभी तक पानी की निकासी के कोई उचित प्रबंध नहीं किए जा सके हैं। यहां एक बहुत बड़ा नाला बहता था जो अब मलबे में दब गया है, लेकिन जब बरसात आएगी तो पानी आगे जाने के लिए रास्ता ढूंढेगा।ऐसे में अब यहां के बाशिंदों को फिर से किसी बड़ी अनहोनी का डर सताने लग गया है। स्थानीय निवासी रावण सिंह और सोमा देवी ने बताया कि बरसात के मौसम की आहट उन्हें अभी से ही डराने लग गई है, क्योंकि यहां पानी की निकासी के कोई पुख्ता बंदोबस्त नहीं हैं। मौके पर जाकर देखा तो पता चला कि यहां भारी मलबा आने के बाद कुछ जगह अस्थायी जलाशय बन गए हैं। भीषण गर्मी में भी इनका पानी नहीं सूखा है। बरसात का मौसम आने पर यह जलाशय कहर बनकर टूटेंगे। वहीं लोक निर्माण विभाग ने मात्र खानापूर्ति के लिए तीन फीट का एक पाईप पानी की निकासी के लिए लगा दिया है। इस पाईप के सामने भी पहले पानी इकट्ठा होगा और फिर वो मलबे को अपने साथ बहाकर ले जाने के बाद रास्ता बनाएगा।

डीसी बोले, अभी जारी है कोटरोपी में काम

डीसी मंडी ऋग्वेद ठाकुर ने बताया कि कोटरोपी में पानी की निकासी के उचित प्रबंध करने के लिए प्रशासन ने 16.50 लाख की अतिरिक्त राशि जारी की है और वहां पर काम जारी है। उन्होंने आश्वस्त किया कि बरसात के मौसम से पहले पानी की निकासी के उचित प्रबंध कर लिए जाएंगे।हैरानी है कि कोटरोपी में अभी तक न तो सड़क को पक्का किया जा सका है और न ही गांव की तरफ जाने वाले रास्तों को सुचारू किया जा सका है। हादसे के बाद जो स्ट्रीट लाइट यहां लगाई गई थी उन्हें भी बंद कर दिया गया है और ऐसा कहा जा रहा है कि इन्हें बरसात के मौसम में फिर से ऑन कर दिया जाएगा। कोटरोपी को लेकर भले ही जो दलीलें दी जा रही हों लेकिन हालात यही बता रहे हैं कि आने वाला बरसात का मौसम रात भरोसे ही है।

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