अच्छे-बुरे पर रहती है ईश्वरीय आंख की नजर

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प्राचीन काल से एक सर्वशक्तिमान देवता की कल्पना की गई जो सभी ताकतों से ऊपर है। हम अपने जीवन में जो भी अच्छा-बुरा करते हैं उस पर उसकी नजर रहती है। उससे कुछ भी छिपा नहीं रहता। इस ब्रह्मांडीय आंख में इतनी ताकत है कि वह समस्त सृष्टि के तिनके-तिनके को देख सकती है।

ईश्वरीय ताकत की प्रतीक यह आंख मिस्र के पिरामिडों पर पाई गई है। ऐसी ही आंखें उनके राजाओं की कब्रों में दफ़न हैं। इसके पीछे यह धारणा थी कि राजा की मृत्यु के बाद भी यह आंख उसकी देखभाल करती रहेगी। हिंदू धर्म में शक्तिपीठों पर चांदी की आंख चढ़ाए जाने की परंपरा है। इसके अलावा बहुत सारे धार्मिक प्रतीकों के साथ भी इस आंख का अस्तित्व पाया जाता है। पुराने ग्रंथों में भी यह आंख है। कहीं-कहीं यह त्रिकोण के अंदर है। हिंदू धर्म परंपरा में त्रिनेत्र से सब परिचित हैं। भगवान शंकर ही नहीं कितनी देवियां भी त्रिनेत्रा हैं। इसका रहस्यात्मक अर्थ उसी तीसरी आंख से जुड़ता है जो भूत-भविष्य वर्तमान सब देखती है। कितनी ही प्राचीन सभ्यताओं में इस आंख का जिक्र है और यह परंपरागत है।

कहीं तो यह ईश्वरीय भय उत्पन्न करती है और कहीं चेतावनी का संकेत है। इसे आध्यात्मिक शक्ति के रूप में भी माना गया है। मिस्र के पिरामिडों की दीवारों पर यह आंख है। कहीं- कहीं पुस्तकों के प्रकाशन में भी इसे प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया गया है। संक्षेप में इसे तीसरी आंख ही कहते हैं। जो रहस्य के क्षेत्र में प्रवेश करते हैं उनकी आत्मबोध की प्रप्ति को भी तीसरी आंख खुलने के नाम से संबोधित किया जाता है। यह ईश्वरीय आंख एक ऐसी सत्ता है जो सर्वोपरि हैऔर जिसकी नजर दुनिया की हर घटना पर है। सूर्य-चांद, सितारे यहां तक कि ब्रह्मांड के एक-एक अणु पर उसकी नजर है। इस आंख को शासक के प्रबल प्रभाव के तौर पर भी देखा गया है। यू एस के एक डॉलर पर भी इस प्रतीक को त्रिकोण में दिखाया गया है। इस त्रिकोण के चारों ओर प्रकाश की किरणें फैली हुई हैं। इसका छोटा सा अर्थ है कि विश्व में अलग-अलग धर्म हैं अलग भगवान हैं पर एक ऐसी शक्ति है जिसका स्थान सबसे ऊपर है। वह सबको देखता है और उसे किसी मानवीय घर में नहीं कैद किया जा सकता।

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