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क्या आप मानते हैं मेंटल टेलीपैथी को

Do you believe in mental telepathy

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मानसिक संवाद यानी विचारों के संवहन के जरिए मानसिक संपर्क है। ऐसे लाखों मामले सामने आए हैं जब लोगों ने गोपनीय बातें करने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल किया है। इसके बावजूद ऐसे लोगों की बड़ी संख्या है जो इसमें विश्वास नहीं करते। बेहद सशक्त होते हुए भी इस विधा का सच क्या है इसे आज तक प्रमाणित नहीं किया जा सका।

Mental telepathyक्या सचमुच मेंटल टेलीपैथी का कोई अस्तित्व है और क्या हम इस पर विश्वास कर सकते हैं…? दरअसल यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो दूर बैठे दो व्यक्तियों को इस तरह बात करने का अवसर देती है, जिसमें वे दोनों न बोलते हैं और न एक-दूसरे को दिखाई देते हैं और किसी यंत्र का भी इस्तेमाल नहीं करते। यह जरूर है कि विचारों के माध्यम से दोनों की बातें एक दूसरे तक पहुंचती रहती हैं।

प्रयोग करने में यह दूरी इतनी छोटी भी हो सकती है कि दोनों व्यक्ति एक दूसरे के सामने बैठे हों और उनके बीच में सिर्फ एक मेज का फासला हो अथवा यह बातचीत दुनिया के किसी दूसरे कोने से चल रही हो। यह विचारों के संवहन के जरिए मानसिक संपर्क है। सच यही है कि जब आप किसी से भावनात्मक गहराई से जुड़े होते हैं तो सामान्य आदमी के जीवन में भी ऐसा हो जाता है। एक मां के मन की संवेगात्मक लहरें इसी प्रकार की होती हैं जो वह अपने बच्चे के लिए अनुभव करती है। ऐसा ही किसी निकटतम मित्र, परिचित या माता-पिता को लेकर भी हो सकता है।

इतनी सुंदर विधा को वैज्ञानिक तौर पर अब तक प्रत्यक्ष प्रस्तुत नहीं किया जा सका है। वास्तव में मेंटल टेलीपैथी पूरी तरह मन की भावना से जुड़ा हुआ है। जब तक किसी के प्रति तीव्र संवेगात्मक लहरें नहीं उठेंगी तबतक यह विधा काम नहीं करेगी। मेंटल टेलीपैथी सही परिणाम देने के लिए भावनात्मक आधार मांगती है। ऐसे प्रयोग जब भी किए गए हैं एकदम सटीक परिणाम मिले हैं। दो अपिरचित लोगों के बीच मेंटल टेलीपैथी काम नहीं करती। यह वहीं काम करेगी जहां भावनात्मक रिश्ते गहरे होंगे। यह रिश्ता मां बेटे का,भाई-बहन,प्रेमी-प्रेमिका ,पति-पत्नी या फिर गुरु-शिष्य का भी हो सकता है।

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