बारिश-बर्फबारी न होने से किसान-बागवान टेंशन में, गेहूं-सेब की फसल पर मंडराया संकट

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शिमला। लगाार चल रहे ड्राई स्पैल ने किसानों-बागवानों की चिंताएं बढ़ा दी है। बर्फ और बारिश न होने से किसानों-बागवानों को अच्छी फसल की चिंता हो गई है। एक तरफ गेहूं की फसल पर असर की संभावना बढ़ गई है, वहीं सेब बागवानों को भी फसल के खराब होने का डर सता रहा है। हालांकि ठंड होने से चीलिंग आवर पूरे हो रहे हैं, लेकिन बारिश व बर्फबारी न होने से बागीचों में खाद नहीं डाली जा पा रही है। उधर, साफ मौसम देख अब बागवान सेब के पौधों प्रूनिंग में जुटे हैं और बाकी सारा काम बंद रखा है। वैसे आजकल पौधों के तौलिए भी किए जाते हैं और फिर खाद डाली जाती है, लेकिन खुश्क मौसम के चलते खुदाई का काम बंद रखा है। सूखे मौसम में खुदाई से जमीन में और सूखे की संभावना है। इसे देखते हुए बागवान पौधों की कांट-छांट (प्रूनिंग) में लगे हैं। बागवानी विशेषज्ञ भी आजकल के समय को पौधों की कांट छांट के लिए उचित मानते हैं। बागवान भी बर्फबारी से पहले पौधों में प्रूनिंग का कार्य निपटाना चाहते हैं, ताकि बर्फ पड़ने की स्थिति में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पौधों के कोई नुकसान न हो। क्योंकि अब गिरने वाली बर्फ वजनदार होती है और उसमें पेड़ पौधों को नुकसान का डर रहता है।

बागवानी विश्वविद्यालय नौणी के वैज्ञानिक डॉ. विजय ठाकुर के मुताबिक बर्फबारी और बारिश न होने से सेब के बागीचों में नमी काफी कम हो रही है। ऐसे में अभी पौधों में तौलिए और अन्य कोई काम नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि इस समय पौधों की कांट छांट ही किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बर्फबारी होने के बाद ही बागवान तौलिए बनाएं और पौधों में खाद डालें। उन्होंने कहा कि यदि अगले कुछ दिनों में बर्फबारी या बारिश होती है तो बागीचों में नमी मिलनी शुरू हो जाएगी।

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