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Dry weather : फसल की बिजाई न करें, खराब हो जाएगी

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शिमला। प्रदेश में मौसम के शुष्क रहने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें आने लगी हैं। पिछले करीब दो माह से राज्य में नाममात्र बारिश हुई है।इससे किसान अपनी खेती को लेकर चिंतित हैं और यदि अगले कुछ दिन भी सूखे निकल गए तो बीजी गई फसल के खराब होने की संभावना है। आगे होनी वाली बिजाई में काफी देरी होने से फिर फसल के खराब रहने की चिंता सता रही है। हालांकि, अभी सेब और अन्य फलों के लिए मौसम ठीक है। क्योंकि इस शुष्क मौसम से अभी सेब पर कोई विपरीत असर नहीं है।

  • प्रदेश में पहली अक्टूबर से 26 नवंबर तक हुई बारिश औसत बारिश से 91 फीसदी कम है।
  • इस दौरान राज्य में मात्र 5.3 मिलीमीटर बारिश ही हुई है, जबकि सामान्य बारिश 56.8 मिलीमीटर होती है।
  • प्रदेश का सोलन जिला ही ऐसा जिला है, जहां सामान्य से 69 फीसदी कम बारिश हुई है। बाकी जिलों में आंकड़ा तो 70 फीसदी से ऊपर है और यह 99 फीसदी तक है।
  • हमीरपुर जिले में 99 फीसदी कम बारिश हुई है, यानी इस जिले में करीब दो माह से कोई बारिश नहीं हुई है।
  • कांगड़ा जिले में भी स्थिति कमोबेश ऐसी है। इस जिले में औसत से 94 फीसदी कम बारिश हुई है, जबकि शिमला जिले में 85 फीसदी कम बारिश हुई है।

kisan1-1बिलासपुर में सामान्य से 77 फीसदी कम, चंबा में 87 फीसदी, कुल्लू में 91 फीसदी, मंडी में 77 फीसदी, सिरमौर में 82 फीसदी और ऊना में 84 फीसदी कम बारिश हुई है। जनजातीय जिलों में वैसे ही कम बारिश होती है और इनमें किन्नौर में सामान्य से 97 फीसदी और लाहौल-स्पीति में 99 फीसदी कम बारिश हुई है।

प्रदेश में दो माह से बारिश न होने से किसानी पर बुरी तरह असर हुआ है। किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए हैं और इस उम्मीद में हैं कि जल्द से जल्द बादल उमड़े और मेघ बरसे, लेकिन उन्हें हर दिन निराशा ही हाथ लग रही है। निचले इलाकों में गेहूं की बिजाई होनी है, लेकिन किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। बारिश न होने से खेत बिलकुल सूखे हैं और ऐसे में बिजाई करना कठिन है। प्रदेश में सिंचाई मौसम पर ही निर्भर है और जब तक बारिश नहीं होती, बिजाई करना मुश्किल है। यदि किसी ने बिजाई कर दी है तो सिंचाई न होने से बीज अंकुरित नहीं होगा इसके सड़ने का डर है। जिन इलाकों में सिंचाई का कुछ प्रबंध है, वहां तो किसान बिजाई कर रहे हैं, लेकिन राज्य का अधिकतर इलाका ऐसा है, जहां किसानी मौसम पर ही निर्भर है।

kisan1-2उधर, बागवानों को अभी इस मौसम से डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अभी सेब के पौधों को सूखे मौसम का कोई विपरीत असर नहीं है। हां, कुछ इलाकों में सेब में वूली एफिड रोग लगा है। इसके लिए बागवानी विशेषज्ञ छिड़काव को कह रहे हैं। इसके अलावा अभी प्रूनिंग न करने की सलाह भी विशेषज्ञ दे रहे हैं। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज के मुताबिक आजकल बागवानों को सेब के पौधों की प्रूनिंग नहीं करनी चाहिए। जो बागवान आजकल प्रूनिंग कर रहे हैं वह सबसे घातक है और इससे सेब के पौधों की उम्र कम हो रही है। इन पौधों में कैंकर रोग होने की अधिक संभावना है। आजकल बागवानों के पौधों के तनों में चूने का पेस्ट लगाना चाहिए और वह उस तरफ जिस तरफ धूप का असर है। इससे सेब के पौधों में कैंकर रोग नहीं लगेगा। उनका कहना है कि सेब बागवानों को मौजूदा ड्राई स्पैल को लेकर चिंतित होने की जरूरत नहीं है। आजकल का सूखा मौसम खेती के लिए खराब है। क्योंकि इस कारण बिजाई करना मुश्किल है। 

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