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वन भूमि पर सेब के बगीचे : बड़े कब्जाधारियों में फॉरेस्ट का बीट अफसर भी

हाईकोर्ट से स्टेटस रिपोर्ट के लिए सरकार को एक हफ्ते की मोहलत

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शिमला। वन भूमि अवैध रूप से कब्जा करके सेब के बगीचे लगाने वाले बड़े कब्जाधारियों में पंचायत पदाधिकारियों के साथ ही फॉरेस्ट के बीट अफसर भी शामिल हैं। ऐसे बड़े कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई न होने से नाराज हाईकोर्ट को सरकार ने बुधवार को आश्वस्त किया कि कोर्ट के आदेशों का पूरी तरह से पालन किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।

इससे पहले हाईकोर्ट ने वन भूमि पर अवैध कब्जे करने के मामले में उचित कार्यवाई न होने पर सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ताजा स्टेटस रिपोर्ट व एमिकस क्यूरी के सुझावों पर अपनी रिपोर्ट दायर न करने पर सरकार को फटकार लगाई। एमिकस क्यूरी ने कोर्ट को बताया था कई बड़े कब्जाधारी वन विभाग की कार्यवाई में शामिल ही नहीं हैं। स्थानीय लोग ऐसे कब्जाधारियों के बारे में पत्र लिखकर बता रहे हैं।

ये हैं अवैध कब्जा करने वाले रसूखदार

एमिकस क्यूरी ने 8 ऐसे बड़े कब्जाधारियों की जानकारी कोर्ट को दी है। इन 8 कब्जाधारियों में तहसील जुब्बल में गांव बधाल के पूर्व उप प्रधान बाग मल रिखटा, पूर्व उपप्रधान राजेश पिरटा, मौजूदा प्रधान महेंदर, पंचायत सदस्य गुलट राम जेहटा, जुब्बल हाटकोटी रेंज में तैनात वन विभाग के BO लोकेन्द्र सिंह, गीता राम पीरटा, चतर सिंह मेहता व उद्दम लाल चौहान शामिल हैं।

अब दो दिन में जानकारी जुटाएगा वन विभाग

वन विभाग ने कोर्ट को बताया कि 2 दिन के भीतर इनके बारे में पूरी जानकारी जुटा ली जाएगी और एक सप्ताह में कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की बेंच ने सरकार को एक सप्ताह के भीतर ताजा स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए।

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