Happy New Year- नए का करें स्वागत

हर नया साल वह फीनिक्स पक्षी है जो पुराने की खाक पर जन्म लेता है दुनिया भर के लोग उसे हाथों हाथ लेते हैं बड़े प्यार से आगे बढ़कर उसका स्वागत करते हैं। किसी मनभावन मेहमान की तरह प्यार से उसका हाथ पकड़ कर घर में लाया जाता है। गुब्बारे …बंदनवार और आतिशबाजियां पूरे विश्व में… यही तो नए साल की पहचान है। नींद चाहे जितनी भी आए साल की आखिरी रात किसी की आंखें नहीं झपकती। इस रात कोई सोता…ही नहीं। गीत संगीत उल्लास उमंग का खूबसूरत रंगारंग माहौल। आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में नया साल सबसे पहले आता है। जबर्दस्त आतिशबाजी होती है खास कर सिडनी शहर में हांगकांग, जकार्ता, बीजिंग और टोकियो रोशनी से भर जाते हैं। इधर बारह बजे नहीं और उधर नए साल का जन्म हुआ। नए वर्ष के स्वागत में हम पुराने को क्यों भूल जाएं। आखिर उसने भी तो हमें बहुत कुछ दिया है। आइए आदर सहित पिछले साल को विदा करें और नए का स्वागत करें।

new-year5हर कैलेंडर का नया साल अलग :

नववर्ष यानी वर्ष का पहला दिन 1 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन के साथ दुनिया के ज्यादातर लोग अपने नए साल की शुरुआत करते हैं। नए का आत्मबोध हमारे अंदर नया उत्साह भरता है और नए तरीके से जीवन जीने का संदेश देता है। हालांकि यह उल्लास, यह उत्साह दुनिया के अलग-अलग कोने में अलग-अलग दिन मनाया जाता है क्योंकि दुनिया भर में कई कैलेंडर हैं और हर कैलेंडर का नया साल अलग-अलग होता है। एक अनुमान के अनुसार अकेले भारत में ही करीब 50 कैलेंडर (पंचांग) हैं और इनमें से कई का नया साल अलग दिनों पर होता है। भारतीय नववर्ष चैत्र नवरात्र से प्रारंभ होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन उत्तर भारत के अलावा गुड़ी पड़वा और उगादी के रूप में भारत के विभिन्न हिस्सों में नव वर्ष मनाया जाता है। सिंधी लोग इसी दिन चेटी चंद्र के रूप में नववर्ष मनाते हैं। शक सवंत को शालीवाहन शक संवत के रूप में भी जाना जाता है। माना जाता है कि इसे शक सम्राट कनिष्क ने 78 ई. में शुरू किया था। स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने इसी शक संवत में मामूली फेरबदल करते हुए इसे राष्ट्रीय संवत के रूप में अपना लिया। राष्ट्रीय संवत का नव वर्ष 22 मार्च को होता है जबकि लीप ईयर में यह 21 मार्च होता है।

new-year1इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार :

इस्लाम धर्म के कैलेंडर को हिजरी साल के नाम से जाना जाता है। इसका नववर्ष मोहर्रम माह के पहले दिन होता है। हिजरी कैलेंडर कर्बला की लड़ाई के पहले ही निर्धारित कर लिया गया था। मोहर्रम के दसवें दिन को आशूरा के रूप में जाना जाता है। इसी दिन पैगम्बर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन बगदाद के निकट कर्बला में शहीद हुए थे। हिजरी कैलेंडर के बारे में एक दिलचस्प बात यह है कि इसमें चंद्रमा की घटती – बढ़ती चाल के अनुसार दिनों का संयोजन नहीं किया गया है। लिहाजा इसके महीने हर साल क़रीब 10 दिन पीछे खिसकते रहते हैं। दुनिया भर में मनाए जाते हैं, 70 नववर्ष तकरीबन सभी पुरानी सभ्यताओं के अनुसार चीन का कैलेंडर भी चंद्रमा गणना पर आधारित है। इसका नया साल 21 जनवरी से 21 फरवरी के बीच पड़ता है। चीनी वर्ष के नाम 12 जानवरों के नाम पर रखे गए हैं। चीनी ज्योतिष में लोगों की राशियां भी 12 जानवरों के नाम पर होती हैं। 1 जनवरी को अब नये साल के जश्न के रुप में मनाया जाता है।

new-yearदुनिया भर में पूरे 70 नववर्ष मनाए जाते हैं :

अकेले भारत में पूरे साल तीस अलग-अलग नव वर्ष मनाए जाते हैं। दुनिया में सर्वाधिक प्रचलित कैलेण्डर ‘ग्रेगोरियन कैलेण्डर’ है। जिसे पोप ग्रेगरी तेरह ने 24 फरवरी, 1582 को लागू किया था। यह कैलेण्डर 15 अक्तूबर, 1582 में शुरू हुआ।जापानी नव वर्ष ‘गनतन-साईं’या ‘ओषोगत्सू’के नाम से भी जाना जाता है। महायान बौद्ध 7 जनवरी, प्राचीन स्कॉट में 11 जनवरी, वेल्स के इवान वैली में नव वर्ष 12 जनवरी, सोवियत रूस के रुढ़िवादी चर्चों, आरमेनिया और रोम में नववर्ष 14 जनवरी को होता है। वहीं सेल्टिक, कोरिया, वियतनाम, तिब्बत, लेबनान और चीन में नव वर्ष 21 जनवरी को प्रारंभ होता है। प्राचीन आयरलैंड में नववर्ष 1 फरवरी को मनाया जाता है तो प्राचीन रोम में 1 मार्च को। भारत में नानक शाही कैलेण्डर का नव वर्ष 14 मार्च से शुरू होता है। इसके अतिरिक्त ईरान, प्राचीन रूस तथा भारत में बहाई, तेलुगू तथा जमशेदी (जोरोस्ट्रियन) का नया वर्ष 21 मार्च से शुरू होता है। प्राचीन ब्रिटेन में नव वर्ष 25 मार्च को प्रारंभ होता है।

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