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मन की स्थिरता बनाए रखे चंद्र रत्न मोती

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कुंडली में यदि चंद्र शुभ प्रभाव में हो तो मोती अवश्य धारण करना चाहिए। चंद्र मनुष्य के मन को दर्शाता है और इसका प्रभाव पूर्णतया हमारी सोच पर पड़ता है। मोती का सीधा संबंध चंद्रमा से है। चंद्रमा कमजोर हो तो मोती धारण करना चाहिए हमारे मन की स्थिरता को कायम रखने में मोती अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है। इसके धारण करने से मातृपक्ष से मधुर संबंध तथा लाभ प्राप्त होते हैं। मोती धारण करने से आत्म विश्वास में बढ़ोतरी भी होती है। कुंडली में चंद्र अशुभ होने की स्तिथि में मोती नुकसानदायक भी हो सकता है। पागलपन जैसी बीमारियां भी कुंडली में स्थित अशुभ चंद्र की देन होती हैं, इसलिए मोती धारण करने से पूर्व यह जान लेना अति आवशयक है की हमारी कुंडली में चंद्र की स्थिति क्या है। छोटे बच्चों के जीवन से चंद्र का बहुत बड़ा संबंध होता है क्योंकि नवजात शिशुओं का प्रारंभिक जीवन, उनकी कुंडली में स्थित शुभ या अशुभ चंद्र पर निर्भर करता है। 

pearl1यदि नवजात शिशुओं की कुंडली में चंद्र अशुभ प्रभाव में हो तो बालारिष्ठ योग का निर्माण होता है। फलस्वरूप शिशुओं का स्वास्थ्य बार-बार खराब होता है और परेशानियां उत्त्पन्न हो जाती हैं, इसलिए कई ज्योतिषी और पंडित अक्सर छोटे बच्चों के गले में मोती धारण करवाते हैं। दूध और जल पेय आदि के व्यवसाय से जुड़े लोग मोती धारण करें तो सफलता अर्जित करते हैं। मोती आर्यों में अधिक प्रिय रहा है। इसे चांदी में जड़वाना शुभ रहता है और इसे बाएं हाथ की कनिष्ठा अंगुली में पहनना चाहिए।
5 से 8 कैरेट के मोती को चांदी की अंगूठी में जुड़वाकर किसी भी शुक्लपक्ष के प्रथम सोमवार को सूर्य उदय के पश्चात अंगूठी को दूध, गंगा जल, शक्कर और शहद के घोल में डाल दें। उसके बाद पांच अगरबत्ती चंद्रदेव के नाम जलाएं और प्रार्थना करें-
हे चंद्रदेव मै आपका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आपका प्रतिनिधि रत्न, मोती धारण कर रहा हूं, कृपया करके मुझे आशीर्वाद प्रदान करें।
तत्पश्चात अंगूठी को निकाल कर ॐ सों सोमाय नम: का 108 बार जप करते हुए अंगूठी को अगरबत्ती के उपर से घुमाएं फिर मंत्र के पश्चात अंगूठी को शिवजी के चरणों से लगाकर कनिष्ठा अंगुली में धारण करें। मोती अपना प्रभाव 4 दिन में देना आरंभ कर देता है और लगभग 2 वर्ष तक पूर्ण प्रभाव देता है फिर निष्क्रिय हो जाता है। 2 वर्ष के पश्चात पुनः नया मोती धारण करें। मोती का रंग सफेद और कोई काला दाग नहीं होना चाहिए।

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