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बच्चों में अच्छे संस्कारों की नींव

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बच्चों में अच्छे संस्कारों की नींव परिवार से पड़ती है। कहा जाता है कि माता पिता का  महत्वपूर्ण कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें। बच्चों में संस्कारों का विकास हमेशा अपने से बड़ों को देखकर ही होता है इसलिए अपने आचरण को सही रखना भी उतना ही जरूरी है जितना बच्चे पर ध्यान देना। कहते हैं न ‘अगर ठीक से खाद डाली जाए, तो पौधा बहुत सुंदर होता है’ और संस्कार उसी खाद का काम करते हैं। बच्चों को जब अच्छे संस्कार सिखाएं जाते हैं तब जाकर वे सामाजिक और व्यवहार कुशल बनते हैं। इसके साथ-साथ बच्चों को उनकी गलतियों के भी बारे में बताना और उनको सुधारना भी उतना ही जरुरी है जितना की अच्छे संस्कार देना। बच्चों की गलतियों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। छोटी-छोटी बातें काफी अहमियत रखती है इसलिए बच्चों को ये सिखाना बहुत जरूरी है….
  • जब कुछ पूछ रहे हों तो प्लीज शब्द का प्रयोग करके कोई भी बात पूछें।
  • बच्चे जब आपसे कुछ लें या कोई जब उन्हें कुछ दे तो थैंक यू जरूर बोलें।
  •  बच्चे को जब किसी का ध्यान अपनी तरफ करना हो या वह चाहता है कि लोग उसकी बातों को सुनें तो  उसके लिए एक्सक्यूज मी का प्रयोग करें और विनम्र तरीके से बोलें। जिससे लोग बच्चे की बात को सुन सकें।
  • बच्चे जब कोई काम खेल ,खुद या बाहर जाना हो तो  सबसे पहले अपने बड़ों से अनुमति ले कर ही  बाहर जाएं। यह आदत बचपन में ही पेरेंट्स को डाल देनी  चाहिए।
  • बच्चे से जब कोई उसके बारे में पूछे कैसे हो ,तो वह उनसे पूछें कि वे कैसे हैं। इससे बच्चे के लोगों से कैसे बात करें और कैसे सवाल का उत्तर दें इसकी आदत बन जाएगी 
  • जब आपका बच्चा अपने दोस्त के घर कुछ वक़्त बिता कर घर वापस आ रहा /रही हो ,तो दोस्त के  पेरेंट्स को थैंक यू जरूर बोलें। ऐसी आदत बच्चों में अवश्य होनी चाहिए।
  •  बच्चे जब किसी को फोन करें तो सबसे पहले फोन रिसीव करने वाले को अपने बारे में बताएं। उसके बाद में जिससे बात करनी है, उसके लिए विनम्र होकर बात कराने के लिए कहें।
  •  जब आप किसी का पत्र रिसीव करें तो थैंक यू बोलें और लेटर को सुरक्षित स्थान पर रख दें। पेरेंट्स ऐसे काम के लिए बच्चे कीअवश्य तारीफ करें।
  • बच्चे के सामने कभी अभद्र भाषा का प्रयोग न करें। आगे चल कर वे भी ऐसा बोल सकते हैं। और साथ ही बच्चों को ऐसी बातों को सीखने से दूर रखें उन्हें अच्छी  बातों के बारे में बताएं।
  •  जब छींक या खांसी आये तो मुंह को रूमाल से ढक कर छींके। पब्लिक प्लेस पर नाक में उंगली न करे। बच्चे को खाने के बाद नैपकिन का प्रयोग करने का मैनर्स होना चाहिए।
  •  बड़े जब खाना सर्व करें तभी खाएं।  बच्चे खुद ही जल्दबाज़ी में खाना न परोसने लगें। साथ ही वे बड़ों के टेबल मैनर्स को देख कर फॉलो करें।

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