Government पर बिफरे Water Guard, वाटर सप्लाई बंद करने की चेतावनी

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सुंदरनगर। पिछले करीब एक दशक से जल रक्षक पंचायतों में छह से आठ घंटे ड्यूटी दे रहे हैं। लेकिन, अभी तक प्रदेश सरकार ने इस काडर के कर्मियों के लिए कोई भी नीति नहीं बनाई है। इस बात के विरोध में प्रदेश सरकार के ढुलमुल रवैया के प्रति जल रक्षक बिफर गए हैं। पंचायतों में तैनात 6200 जल रक्षकों ने प्रदेश में वाटर सप्लाई बंद करने और सड़कों पर उतर करके आंदोलन करने का निर्णय लिया। यहां जवाहर पार्क सुंदरनगर में जल रक्षकों ने बैठक का आयोजन किया। जिसकी अध्यक्षता जल रक्षक संघ के प्रधान प्रेम  सिंह ने की।

  • आठ घंटे ड्यूटी पर काडर के कर्मियों के लिए नहीं बनाई कोई ठोस नीति
  • समय पर कर्मियों को वेतन नहीं मिल रहा है वेतन, गुजारा हुआ मुश्किल

​बैठक में तमाम जल रक्षकों ने निर्णय लिया है कि पिछले दस सालों से सरकार इस काडर के कर्मियों की अनदेखी कर रही है।  समय पर कर्मियों को वेतन नहीं मिल रहा है। प्रदेश के अधिकतर जिलों में जल रक्षकों को एक साल से उपर समय बिना वेतन सेवाएं देते हो चुका है। लेकिन, बिना वेतन के परिवार का इस महंगाई के युग में भरण पोषण करने के लिए हाथ खड़े हो गए हैं।

बीजेपी की सरकार ने 600 रुपये बढ़ाया मानदेय और कांग्रेस ने 150 रुपये वृद्धि की
जल रक्षक संघ के प्रधान प्रेम सिंह ने जल रक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार में जल रक्षकों की तैनाती की गई थी, उस समय मात्र 750 रुपये मानदेय दिया जाता था, बीजेपी की सरकार में पूर्व सीएम धूमल ने मानदेय में 600 रुपये बढ़ोत्तरी करके 1350 रुपये किया था। लेकिन, कांग्रेस राज में सीएम वीरभद्र सिंह ने 150 रुपये मानदेय में वृद्धि की है। वह भी आज दिन तक जल रक्षकों को नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जल रक्षकों के लिए कोई भी नीति नहीं बनाई है। इस बात से उग्र होकर प्रदेश भर के 6200 जल रक्षकों ने सड़कों पर उतरने का मन बना लिया है। उन्होंने बताया कि अगर कहीं-कहीं पर कर्मियों को मानदेय भी मिल रहा है तो पंचायत प्रधानों द्वारा इसे देने में विंलब किया जा रहा है और उल्टा छह से आठ घंटे काम लिया जा रहा है। जोकि किसी भी सूरत में  सहनीय नहीं होगा।  बैठक में जल रक्षकों में नरेश, ओम प्रकाश, जगदीश चंद, शेर सिंह, पूनु राम, भीखम राम, संजय, राजू राम, जिन्दु राम, केसर सिंह, राम दयाल, गिरधाारी लाल, हरदेव कुमार, संजय, मोहन लाल, ज्ञान चंद, भूपेंद्र, महेंद्र सिंह व इंद्र सिंह  समेत कर्मी मौजूद थे।

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