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High Court: वनभूमि से हटाए अतिक्रमणों की जानकारी Web Portal में डाले वन विभाग

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शिमला। प्रदेश हाईकोर्ट ने वनभूमि पर अतिक्रमण से जुड़े मामलों में वन विभाग को आदेश दिए हैं कि वह हर सप्ताह वनभूमि से हटाए गए अतिक्रमणों की जानकारी अपने वेब पोर्टल पर डालें। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की ने वनभूमि अतिक्रमण से जुड़ी जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान उपरोक्त आदेश पारित किए। कोर्ट ने वन विभाग को पूरे प्रदेश में यह मुहिम जारी रखे और वनभूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कर अपने कब्जे में ले। इससे पहले हाई कोर्ट ने वनभूमि को अवैध कब्जों से मुक्त न करवा पाने पर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी।

कोर्ट ने कहा था कि वन विभाग के संबंधित अधिकारियों ने कोर्ट में झूठे आकंड़े पेश कर अदालत को गुमराह करने की कोशिश करता है। कोर्ट ने वन विभाग के अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा था कि जब अदालत ने 5 बीघा से अधिक वनभूमि पर अतिक्रमण करने वाले कब्जाधारियों के कब्जे तुरंत हटाने के आदेश दिए थे तो उन्होंने अदालत के आदेशों की अनुपालना क्यों नहीं की। कोर्ट ने वन विभाग के प्रधान सचिव को आदेश दिए कि वह अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ की गई कार्यवाई शपथपत्र के माध्यम से कोर्ट को बताए। 

कोर्ट को खेद, वन विभाग के कर्मी अवैध कब्जाधारियों से मिलकर अदालत के आदेशों की कर रहे अवहेलना

कोर्ट ने अपने पिछले आदेशों में यह भी किया था कि यह ग्राम पंचायत, ग्राम सभा, ग्राम समिति व जिला परिषद के पदाधिकारियों, वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा पुलिस प्रशासन का दायित्व है कि वह कोर्ट द्वारा वनभूमि से अतिक्रमण हटाने बाबत समय-समय पर जारी आदेशों की अक्षरशः अनुपालना  सुनिश्चित करे। कोर्ट ने खेद प्रकट किया कि वन विभाग के कर्मी अवैधकब्जाधारियों से मिलकर अदालत के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि वन विभाग के संबंधित अधिकारी कोर्ट के आदेशों की अनुपालना करने में नाकाम रहते हैं तो कोर्ट को अपने आदेशों की अक्षरशः अनुपालना करवाना बखूबी आता है। अन्यथा इन सबके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

कोर्ट ने प्रधान मुख्य वन अरण्यपाल को आदेश दिए थे कि वह पिछले 6 महीनों का रिकॉर्ड न्यायालय के समक्ष पेश करे। इसके अलावा हाईकोर्ट ने  राज्य सरकार के उपरोक्त अधिकारियों को आदेश दिए थे कि वह विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष दायर करें, जिसमें इस बात का विशेषतया उल्लेख हो कि जो लोग सरकारी भूमि का अवैध ढंग से उपयोग करते हुए लाभ प्राप्त कर रहे थे, कोर्ट के आदेशानुसार उनसे रिकवरी करने हेतु क्या कार्रवाई अमल में लाई गई है। अब वन विभाग को यह सारी जानकारी अपने वेब पोर्टल पर डालनी होगी। इससे वन विभाग की कार्यवाई में पारदर्शिता आएगी व कार्यवाई न होने पर लोग उचित माध्यम से वन विभाग की शिकायत कर सकेंगे। वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी इससे नजर रखी जा सकेगी। मामले पर सुनवाई 2 फरवरी को होगी।

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