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High Court ने दिया झटकाः TCP में किए संशोधन को असंवैधानिक बताते किया रद

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शिमला। हिमाचल प्रदेश के हजारों भवन मालिकों के लिए बुरी खबर है। उनके भवनों को नियमित करने को लेकर हिमाचल हाईकोर्ट में लंबित मामले में फैसला आ गया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में नियमों के विपरीत बने भवनों को नियमित करने को लेकर लाए गए कानून में किए गए संशोधन को असंवैधानिक करार देते हुए रद कर दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिनियम की धारा 30 (बी) में किए गए संशोधन को गैर कानूनी ठहराया है। हिमाचल हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने आज यह आदेश सुनाया।

खंडपीठ ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिनियम की धारा 30 (बी) को किया निरस्त 

खंडपीठ ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिनियम की धारा 30 (बी) को निरस्त करते हुए अपने निर्णय में कहा कि हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य है। यहां दो नगर निगम, 31 नगर परिषद और 21 नगर पंचायत हैं और इनके क्षेत्राधिकार में अदालत द्वारा बार-बार आदेश दिए जाने के बावजूद अवैध निर्माण किए गए हैं। वर्ष 1997 से वर्ष 2006 तक इन अवैध निर्माणों को नियमति करने के लिए सात पॉलिसी बनाई गई और वर्ष 2016 में राज्य सरकार ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिनियम में धारा 30(बी) को जोड़ते हुए भवनों के अवैध निर्माण को नियमति करने बारे प्रावधान रखा। खंडपीठ ने इस प्रावधान को निरस्त किया और कहा कि उक्त संशोधन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 243 जेड डी 243 जेड ई और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिनियम के ऑब्जेक्ट के विपरीत है।

वर्ष 2016 में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिनियम में धारा 30 (बी) को जोड़ा था

गौर हो कि राज्य सरकार ने वर्ष 2016 में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग अधिनियम में धारा 30 (बी) को जोड़ते हुए भवनों के अवैध निर्माण को नियमति करने बारे प्रावधान किया था। इस अवैध निर्माण के एकमुश्त नियमितीकरण के लिए फीस जमा करवाने का भी प्रावधान किया गया था। 31 मार्च 2017 के बाद अवैध निर्माण किए जाने को विधायिका ने दंडनीय बनाया था। नियमितीकरण को सही तरीके से लागू करने के लिए विभाग ने पांच नए कार्यालय खोले थे। प्रदेश भर में अवैध भवन निर्माण को नियमति करने के लिए लगभग 35000 आवेदन प्राप्त हुए थे। इस याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिए थे कि अवैध भवन निर्माण को नियमित करने के लिए 30 मार्च तक जमा करवाए गए आवेदन पत्र पर फिलहाल कोई कार्रवाई न करें। याचिका में आरोप लगाया गया था  कि अवैध निर्माणों को नियमति करने के लिए किया गया संशोधन असंवैधानिक है इसलिए इसे रद किया जाए।

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