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सरकार पर हावी अफसरशाही : अफसरों के अड़ंगे से नहीं हो रहे कर्मचारी हित के कार्य

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शिमला। हिमाचल प्रदेश पशुपालन विभाग फार्मासिस्ट कर्मचारी महासंघ ने कहा है कि राज्य में सरकार पर अफसरशाही पूरी तरह हावी है और वह कर्मचारियों के हितों के कार्य में अड़ंगा डालने का कार्य कर रही है। संघ का कहना है कि उनकी कई मांगें हैं, जिन पर अफसरों के कहने पर सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है। यही नहीं, हालत यह है कि सरकार पर अफसरशाही इतनी हावी है कि वह उन मांगों को भी नहीं मान रही, जिनमें वित्त का कोई लेना-देना नहीं है। इसे देखते हुए संघ ने फैसला लिया है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार ने विचार न किया तो वे चुनाव में कांग्रेस का बहिष्कार करेंगे। संघ के अध्यक्ष दिनेश नेगी ने आज यहां प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर 60 से ज्यादा बार पशुपालन मंत्री अनिल शर्मा से मिले हैं और 53 बार सीएम वीरभद्र सिंह से मिले हैं, लेकिन उनकी मांगों पर कोई फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि उनकी मांग है कि वेटनरी फार्मासिस्टों के पदनाम बदले जाएं। यह पदनाम पंजाब की तर्ज पर इंस्पेक्टर किया जाए। लेकिन इसे लेकर भी सरकार का रुख सकारात्मक नहीं है। इस मांग पर तो सरकार पर कोई वित्तीय बोझ भी पड़ने वाला नहीं हैं। 

महासंघ 20 से 22 सितंबर तक काले बिल्ले लगाकार करेगा कार्य

नेगी ने कहा कि उनकी मांग थी कि चीफ वेटनरी फार्मासिस्टों का ग्रेड पे- बढ़ाया जाए। विभाग में केवल 50 चीफ फार्मासिस्ट हैं और उन्हें 600 रुपए का ग्रेड पे मिलता है और इस मांग को भी सरकार ने पूरा नहीं किया है। इसके साथ-साथ उनकी मांग थी कि पंचायत पशुपालन सहायक को विभाग में अनुबंध पर लाया जाए, लेकिन इस पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया। ये पशुपालन सहायक कई सालों से विभाग में हैं, लेकिन ये अभी तक अनुबंध पर नहीं आए हैं।

उनका कहना था कि विभाग में 1153 पशुपालन सहायक तैनात किए हैं और इनमें से उन सहायकों को अनुबंध पर लाया जाए, जिन्हें विभाग में कार्य करते हुए पांच वर्ष से अधिक समय हो गया है। महासंघ अध्यक्ष नेगी ने कहा कि उनकी मांगें दो बार कैबिनेट में भी लगी थी, लेकिन वहां से वे वापस हो गई। उनका आरोप था कि यह सब अफसरशाही के दवाब में हुआ है और इसकी वे कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर महासंघ 20 सितंबर से 22 सितंबर तक विरोध स्वरूप काले बिल्ले लगाकार कार्य करेगा।

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