डिमांड : छावनियों के Youth को मिले सेना में भर्ती होने का Special quota

सोलन। हिमाचल प्रदेश छावनी कल्याण परिषद ने देश भर की छावनियों में रह रहे युवाओं के लिए सेना में विशेष कोटा आरक्षित करने की आवाज उठाई है। देश के किसी भी हिस्से से अभी तक यह ऐसी पहल नहीं की गई है, जबकि हर सैन्य क्षेत्र के साथ सामान्य नागरिक पिछले दो सौ वर्षों से साथ रहते आ रहे हैं।

  • हिमाचल प्रदेश छावनी कल्याण परिषद ने राज्यपाल को लिखा पत्र 
  • कहा, देश की 62 छावनियों के हजारों युवाओं को मिलेगा लाभ
  • कैंटों में सैनिकों व गैर सैनिकों का दो सौ वर्षों से है चोली दामन का साथ

परिषद के मुख्य संरक्षक शौर्यचक्र विजेता कैप्टन देव सिंह ठाकुर व प्रदेशाध्यक्ष देव आनंद गौतम ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत को पत्र लिख कर पीएम नरेंद्र मोदी से यह सिफारिश करने की मांग की है।

letterराज्यपाल को लिखे पत्र में उन्होंने बताया कि छावनी क्षेत्रों में सैनिकों व सिविल लोगों का चोली-दामन का साथ है। दो सौ वर्ष पूर्व जब छावनियों की स्थापना हुई थी, तभी से सैनिकों की सुविधाओं के लिए सिविल लोगों को उनके साथ बसाया गया था ताकि अपने कारोबार के माध्यम से वह सैनिकों को जरूरत की वस्तुएं उपलब्ध करवा सकें। यही कारण है कि छावनी क्षेत्रों में रहने वाले सामान्य नागरिक सैनिकों के जीवन को बहुत करीब से देखते हैं। छावनी के युवाओं में भी सेना में जा कर देश सेवा करने का भरपूर जज्बा होता है, लेकिन आज तक उनके विषय में गंभीरता से नहीं सोचा गया। उन्होंने बताया कि देश के 19 राज्यों में 62 छावनियां हैं, जिनमें से सात छावनी क्षेत्र कसौली, सुबाथू, जतोग, डगशाई, योल, बकलोह और डलहौजी हिमाचल में हैं। छावनी बोर्डों के माध्यम से जो सुविधाएं सिविल लोगों को मिलती हैं, उससे जनता का पूर्ण विकास नहीं हो पाता।

protest-3गैर सरकारी संस्थाओं को भी छावनियों के विकास के लिए कोई मदद नहीं मिलती और यदि कोई संस्था अपने स्तर पर जनहित के कार्य करना चाहे तो छावनी बोर्ड द्वारा उसे भूमि उपलब्ध नहीं करवाई जाती। ऐसे में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़कों की मरम्मत में कई परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। सुबाथू की बदहाल सड़कें इसका ताजा उदाहरण है। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों का छावनियों में चयन ही नहीं होता और न ही उन्हें केंद्र व प्रदेश से कोई मदद मिलती है। महिला मंडल, युवक मंडल, खेल मैदान, सामुदायिक भवन इत्यादि का निर्माण तो छावनियों की जनता के लिए सपने के समान हैं। चाहते हुए भी आज तक इन सुविधाओं से जनता महरूम है। उनका कहना है कि देश की 62 छावनियों में रहने वाले गैर सैनिक लोगों की संख्या करीब 25 लाख है। हालांकि छावनियों के युवाओं को सेना में भर्ती होने पर कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन यदि सरकार छावनियों के युवाओं के लिए सेना में भर्ती का विशेष कोटा निर्धारित करती है तो यहां के अधिक से अधिक युवा देश सेवा करने के लिए आगे आ सकते हैं।

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