किसानों की समस्याओं को लेकर Himachal किसान सभा का मंथन

शिमला राज्यभर में किसानों की समस्याओं पर आज हिमाचल किसान सभा ने मंथन किया। माकपा के किसान संगठन हिमाचल किसान सभा ने अपने दो दिवसीय सेमिनार के पहले दिन देश की बीजेपी शासित एनडीए सरकार की नवउदारवादी नीतियों की कड़ी आलोचना की गई। सेमिनार में कहा गया है कि आज देश के किसानों को सरकारें अपने हाल पर छोड़कर पीछे हट रही हैं और ये केवल उद्योगपतियों के इशारों पर कार्य कर रही है इस सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर माकपा के राज्य सचिव और हिमाचल सेब उत्पादक संघ के राज्य महासचिव डॉ. ओंकार शाद ने कहा कि आज देश को आजाद हुए 70 वर्ष पूरे हो गए हैं, लेकिन इस अवधि में देश व प्रदेश की बीजेपी और कांग्रेस शासित सरकारों ने किसानी के क्षेत्र की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि आज इसके परिणाम सामने हैं कि कृषि किसी भी तरीके से लाभकारी न होने से लोग किसानी से विमुख हो रहे हैं।

किसान आत्महत्या की दर में कमी आने के बजाए बढ़ौतरी हो रही

डॉ. शाद ने कहा कि आज देश का अधिकांश किसान अपने जीवन यापन की लड़ाई लड़ रहा है, जबकि सरकारों की नीतियां किसान को खेती से पलायन करने व बड़े कॉरपोरेट के हवाले करने को मजबूर कर रही है। नतीजतन आज देश में किसान आत्महत्या की दर में कमी आने के बजाए बढ़ौतरी हो रही है। क्योंकि न तो स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जा रहा है और न ही किसानी में सार्वजनिक निवेश को बढ़ाया जा रहा है। आश्चर्य की बात है कि कृषि बीमा के नाम पर केंद्र की मोदी सरकार ने लगभग 21,000 करोड़ रुपये किसानों की जेब से निकाल कर मात्र 700 करोड़ ही खर्च किए हैं।

 प्रदेश की कृषि के परिदृष्य पर चर्चा करते हुए किसान सभा के राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर ने कहा कि कृषि में सरकारी निवेश नगण्य होने के कारण किसान अपना गुजर-बसर अपने ही प्रयासों से कर रहे हैं। उल्टे सरकार किसानों को उनकी भूमि तक से बेदखल करने पर तुली है। अपनी फसलों को बचाने के लिए पिछले सालों की तुलना में आज जंगली जानवरों का कहर भी बढ़ा है।

जहां महिलाओं के सामने अश्लील गालियां देते हैं लोग, नहीं मानता कोई बुरा

You might also like More from author

Comments