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बुजुर्ग @ उनसे बात करें… उनकी देखभाल करें

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क्या आपने अपने माता-पिता के व्यवहार में परिवर्तन देखना शुरू कर किया है? मां या पिता, अपना रख रखाव उस प्रकार से नहीं कर पाते हैं जैसे वह पहले आसानी से करते थे। आपने गौर किया है कि आपके पिता की मेज भर गई है या फिर आपकी मां अपने रहन-सहन और सजावट पर ध्यान नहीं दे रही हैं। तो फिर उन्हें आपके देखभाल की जरूरत है। बुजुर्ग माता-पिता की सेवा करना आसान काम नहीं है लेकिन यहां कुछ ऐसे स्टेप्स बताएं जा रहे हैं, जो आपके इस कठिन काम को आसान करने में आपकी मदद करेंगे …

  • बुजुर्ग बहुत ज्यादा भावुक हो जाते हैं, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि आप उनके पास बैठें और उनसे बातें करें ताकि उन्हें उनकी परिस्थितियों के साथ सहज महसूस हो वरना वह अपने बुढ़ापे को कोसने लगते हैं।
  • जब भी डॉक्टर के पास जाएं तो उनके साथ रहें। यह उनके लिए सुकून की बात होगी और उन्हें इससे मदद भी मिलेगी कि डॉक्टर से चेकअप करवाते समय उनके साथ कोई है। इसके अलावा, आपको भी उनके इलाज के प्लान के बारे में और दवाइयों के बारे में जानकारी हो जाएगी।
  • उस शेड्यूल को किसी ड़ायरी या कैलेंडर में बनाएं, जिसमें आप उनके अप्वॉइंटमेंट या फिर अन्य कार्यों को लिख लें ताकि समय पर उन्हें पूरा किया जा सके।

  • भले ही आप बहुत व्यस्त हों फिर भी उनके लिए दिन में थोड़ा सा समय निकाल लें। उनके साथ कोई गेम खेलने की कोशिश करें या फिर बाहर सैर के लिए जाएं। इससे आप लोगों में प्यार बना रहेगा।
  • देखभाल करने का मतलब यह हरगिज नहीं कि आप हमेशा उन पर सवार रहें। उन्हें अकेले में भी समय गुजारने दें। उन्हे उनके लिए एक निजी कमरा दें ताकि वे अपना निजी वक्त, कुछ खास लोगों या दोस्तों के साथ गुजार सकें। उनकी मदद तभी करें जब उन्हें आपकी जरूरत हो।
  • घर के बड़े-बुजुर्ग सेहत से जितना तंदरुस्त और फिट रहेंगे यह उनके लिए और परिवार के लिए भी अच्छा रहेगा। व्यायाम और योग उनके दिनचर्या में शामिल हो इसके लिए उन्हें प्रेरित करते रहें।

  • डॉक्टरों की मानें तो 60 से ज्यादा उम्र के लोगों को रोजाना 30 मिनट व्यायाम करने की सलाह दी जाती है। इसमें टहलना, जॉगिंग करना, स्वीमिंग करना, साइकिल चलाना से लेकर योग और कसरत तक शामिल है।
  • कमजोरी ज्यादा महसूस करना, भूलने की शिकायत ज्यादा होना, रास्ता भूल जाना और चलने-बैठने में संतुलन खो देना जैसे कुछ जरुरी शारीरिक और मानसिक बदलाव पर हमेशा नजर बनाए रखें।
  • बुजुर्गों को मानसिक बीमारी में ही देखभाल की ज्यादा जरूरत होती है। खासकर अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारी होने पर उन्हें पल-पल एक गाइड और केयरटेकर की जरूरत होती है।

  • वसीयत, पॉवर ऑफ अटार्नी समेत ऐसे कई कानूनी मामलों में आप माता-पिता से बेहिचक बात करें। उन्हें सलाह भी दें और उनसे सलाह भी लें। इससे रिश्ते में खुलापन आएगा और असहमति के रास्ते बंद होंगे। अगर उन्हें किसी अच्छे वकील या फिर कानूनी सलाह की जरुरत है तो यह सेवा उन्हें उनके मन के मुताबिक उपलब्ध कराएं।
  • उन्हें लंबे समय तक अकेला कहीं नहीं छोड़ें। अगर आपके माता-पिता ओल्ड एज होम में रहते हैं तो समय-समय पर उनसे मिलने जाएं और उनसे खुल कर बात करें
  • उनके गुस्से और विरोध को सहने की क्षमता रखें। कभी भी असहमति में बोले गए आपके स्वर इतने तल्ख न हों कि उनके दिल को ठेस पहुंच जाए।
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