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कर्नाटक : JDS ने BJP पर लगाया खरीदफरोख्त का आरोप

JDS alleges BJP of horsetrading in Karnataka 

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नई दिल्ली। कर्नाटक में जहां हंग एसेंबली की स्थिति में सभी की निगाहें राज्यपाल वजुभाई वाला के फैसले पर टिकी हुई हैं, वहीं JDS ने दावा किया है कि BJP ने सरकार में आने के जोड़तोड़ शुरू कर दी है। पार्टी ने बुधवार को दावा किया कि BJP के नेताओं ने उनके दल के पांच नवनिर्वाचित एमएलए से संपर्क साधकर मंत्री पद देने का लालच देकर सपोर्ट मांगा है। 
कर्नाटक की 224 में से 222 सीटों पर हुए मतदान के बाद BJP 104 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, वहीं कांग्रेस 78 और JDS 38 सीटों के साथ दूसरे और तीसरे नंबर पर है। पूरे नतीजे आने के फौरन बाद कांग्रेस ने सक्रियता दिखाते हुए JDS को बिना शर्त सपोर्ट देने का ऐलान कर दिया। उसके बाद JDS ने राज्यपाल से मिलकर कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। इस बीच BJP के सीएम पद के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा ने कहा है कि पार्टी विधायक दल की बैठक में नया नेता चुने जाने के बाद वे राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। पार्टी ने राज्यपाल से गुरुवार को मिलने का समय मांगा है।

काल करे सो आज कर

इस एक दिन की देरी को लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सूत्रों का कहना है कि BJP अभी बुधवार को कांग्रेस और JDS के विधायकों को तोड़ने की हर मुमकिन कोशिश करने के बाद ही राज्यपाल से मिलने जाएगी। ऐसे में JDS के दावे में दम नजर आता है, जिसमें उसने कहा है कि पार्टी के 5 एमएलए को खरीदने की कोशिश की गई। हालांकि, पांचों एमएलए ने BJP के ऑफर को ठुकरा दिया है।

लॉ एक्सपर्ट्स की राय

कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि जिस तरह गोवा और मणिपुर में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने के बाद कांग्रेस ने सरकार बनाने की पेशकश की थी, BJP को भी वही तर्क सामने रखना चाहिए। दोनों राज्यों में कांग्रेस को ज्यादा वोट मिलने के बावजूद BJP ने क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाई थी। वहीं, पूर्व अटर्नी जनरल सोली सोराबजी का मानना है कि पहले सबसे बड़ी पार्टी को न्योता दिया जाना चाहिए। सदन के फ्लोर पर वह 7 से 10 दिन में अपना बहुमत साबित करे। अगर वह पार्टी बहुमत साबित नहीं कर सकी तब अगली सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन को न्योता दिया जाना चाहिए। अगर वह भी बहुमत साबित नहीं कर सके, ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति शासन लगना चाहिए। लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप का कहना है कि राज्यपाल को किसी भी पार्टी, चुनाव से पहले या बाद में बने गठबंधन को न्योता देना होता है, अगर वह इस बात से संतुष्ट हैं तो जिसे वह न्योता दे रहे हैं, वे सदन में बहुमत साबित कर सकेंगे।

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