कंडा से फरार कैदी मामलाः गिरफ्त से दूर, पुलिस खंगाल रही जंगल

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शिमला। आदर्श कंडा जेल से फरार हुए तीन खूंखार कैदियों की तलाश में जुटी पुलिस के हाथ कोई सफलता नहीं लगी है। अंडर ट्रायल चल रहे इन तीनों कैदियों की धरपकड़ को पुलिस ने तीन टीमें बनाई हैं, लेकिन अभी तक वह उन्हें सफलता नहीं मिली है।

  • 25 सदस्यों की टीम कर रही तलाश, बार्डर पर भी रखी जा रही है नजर

कुल मिलाकर इस काम में 25 सदस्यों की टीम लगी है और वह जेल के साथ लगते इलाकों को खंगालते हुए आगे बढ़ रही है और राज्य की सीमा के करीब तक पहुंच गई है। बार्डर पर भी पुलिस की पैनी नजर है और सादी वर्दी में भी जवान इन तीनों कैदियों पर नजर रखे हुए हैं।Kanda Jail

तलाशी के लिए विशेष अभियान शुरू

जेल विभाग ने उप अधीक्षक रैंक के अधिकारियों को इन कैदियो की खोज का जिम्मा सौंपा है, लेकिन अभी तक इनका कोई सुराग नहीं मिला है। मिली जानकारी के मुताबिक इन तीनों कैदियों की तलाश में जुटी टीमें प्रदेश की सीमाओं के साथ-साथ साथ लगते जंगलों में तलाश में जुटी है। उधर, शिमला जिले से लगती उत्तराखंड की सीमा, किन्नौर और सिरमौर जिले के मार्गों पर इनके फरार होने के बाद से ही पैनी निगाह रखी गई है।

ये तीनों कैदी मंगलवार और बुधवार की मध्य रात्रि कंडा जेल से फरार हो गए थे। इनमें से दो कैदी रेप के मामले में और एक मर्डर के केस में वहां बंद थे। लीला धर नामक अंडर ट्रायल कैदी एक अक्टूबर 2015 से कंडा जेल में बंद था। जबकि प्रताप सिंह एक बच्ची से बलात्कार के जुर्म में जेल में था। वहीं, प्रेम बहादुर भी रेप के आरोप में 16 जुलाई 2015 से कंडा जेल में बंद था। इनके फरार होने के बाद से ही इनकी तलाशी को विशेष अभियान शुरू कर दिया गया था, लेकिन अभी तक ये पकड़ में नहीं आ पाए हैं और पुलिस का सर्च आपरेशन जारी है।

कई सवालों के जवाब खोज रही पुलिस

कंडा जेल से फरार हुए कैदियों के मामले में पुलिस ने दो संतरियों को सस्पेंड कर रखा है, लेकिन ये कैदी कैसे फरार हुए, उसकी जांच चल रही है। एसपी जेल की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी का गठन किया है और वह इसमें जुटी है। जेल के एक बैरक में 28 में से 3 ही कैदी कैसे फरार हुए, इसे लेकर जांच हो रही है।

मिली जानकारी के मुताबिक जेल के अधिकारी सभी तथ्यों की पड़ताल करने के बाद डीजीपी को अपनी रिपोर्ट देंगे। कैसे उनके पास रेलिंग काटने को पत्ती मिली और कैसे बिना शोर के वह काटी गई और क्या बाकी सभी कैदी उस समय अचेत थे। या वे सब जानते थे और यदि जानते थे तो वे क्यों नहीं भागे। ये सब ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब जांच कमेटी को ढूंढना है।

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