लिटफेस्ट का हिस्सा बनना गौरव का पल

कसौली। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कसौली में आयोजित खुशवन्त सिंह के पांचवे वार्षिक लिटफेस्ट साहित्यिक उत्सव की अध्यक्षता करते हुए कहा कि खुशवंत सिंह एक सज्जन पुरुष, प्रख्यात पत्रकार, साहित्यकार, अनुभवी सांसद तथा वृहद ज्ञान के भण्डार के अलावा खुशनुमा व मजाकिया स्वभाव के व्यक्ति थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस उत्सव का हिस्सा बनना उनके लिए गौरव के पल हैं।

  • सीएम ने किया खुशवंत सिंह नेचर ट्रेक का शुभारम्भ
  • सोलन पर कॉफी टेबल बुक का विमोचन

उन्होंने कहा कि खुशवंत सिंह ने जुनून एवं कड़ी मेहनत के साथ भारतीय विधिक प्रणाली एवं साहित्य में सेवाएं दीं। उन्होंने कहा कि वह खुशवंत सिंह के स्तम्भ (कॉलम) के नियमित पाठक रहे हैं और उनकी कुछ पुस्तकों से वह काफी प्रेरित भी हुए हैं। उन्होंने कहा कि ‘ट्रेन-टू-पाकिस्तान’, ‘दिल्लीः एक उपन्यास’, ‘द कंपनी ऑफ वुमन’, ‘टरूथ’, लव एण्ड ए लिटल मैलाईस’ जैसी उनकी पुस्तकों ने पाठकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी है।
cm-solan-1वीरभद्र सिंह ने कहा कि कसौली बाजार से नीचे कालका के मैदानी भाग तक 18 लाख रुपये की लागत से विकसित होने वाले 9 किलोमीटर लंबे‘खुशवन्त सिंह ट्रेल’ एक प्राकृतिक ट्रेक का शुभारम्भ करते हुए उन्हें सुखद अनुभूति हो रही है। खुशवंत सिंह इस ट्रेक पर नियमित भ्रमण करते थे। उन्होंने कहा कि खुशवंत सिंह के नाम पर पांचवें साहित्यिक उत्सव का शीर्षक ‘ब्रेकिंग बैरियर्स’ शायद लड़कियों की शिक्षा तथा पारिस्थितिकी संरक्षण, जिससे खुशवंत सिंह का नजदीकी लगाव था, के उद्देश्य को समर्पित है। उन्होंने कहा कि उत्सव महान भारतीय सिपाहियों को भी समर्पित है और खुशवन्त सिंह का सेना के प्रति भी गहरा प्रेम था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कसौली खुशवंत सिंह के हृदय के बिल्कुल करीब था, क्योंकि यहां पर उनका घर है और वह गर्मियों के दौरान अक्सर यहां आते थे और अपने विचारों को कलमबद्ध करते थे।

  • सीएम ने कहा कि यह उत्सव एकमात्र उत्सव है जो किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर है, साथ ही हिमाचल प्रदेश में आयोजित किया जाने वाला एकमात्र साहित्यिक उत्सव है।
  • मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर मीनाक्षी चौधरी द्वारा संपादित एवं संकलित तथा जिला सांस्कृतिक परिषद सोलन द्वारा प्रकाशित ‘सोलन ए मोजाईक ऑफ एक्सपीरियंस’ एक कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया।
  • इस अवसर पर उरी हमले के शहीदों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया। जम्मू व कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, वित्तायोग के पूर्व अध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलुवालिया भी उपस्थित थे।

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