ग्रहणकाल में करें लक्ष्मी सिद्धि

जीवन में अर्थ संकट ही सारे दु:खों का कारण है। लक्ष्मी साधना इस तकलीफ को थोड़ा कम कर सकती है। लक्ष्मी साधना के लंबे-चौड़े नियम पूरे न कर सकें तो छोटी साधनाओं से भी सफलता अर्जित की जा सकते हैं। लक्ष्मी की उपासना से सभी देवी-देवता साधक पर स्वयं ही कृपा करने लगते हैं इसलिए लंबे अनुष्ठान की जगह, ग्रहण के आरंभ से लेकर ग्रहण की समाप्ति तक मंत्र जप कर के मां लक्ष्मी को प्रसन्न किया जा सकता है।

lakshmi-pray-2इसके लिए किसी ऐसी जगह का चुनाव करें जो शोर से रहित हो तथा वहां से बैठ कर आप हो रहे ग्रहण पर पूरी दृष्टि रख सकें। अपने सामने लक्ष्मीजी की मूर्ति या चित्र की स्थापना करें। पूजन में लाल पुष्पों और लाल ही नैवेद्य का प्रयोग करें। धूप-दीप अर्पित करने के बाद अपनी कामना का संकल्प लेकर जप आरंभ करें। वैसे यह जप एक लाख का है और नियमित अनुष्ठान के तौर पर सात दिन में पूरा किया जाता है परंतु ग्रहण काल का समय प्रभावशाली होने के कारण कम समय में ही सफलता प्राप्त की जा सकती है।

मंत्र :

ऊँ श्री कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद प्रसीद श्रीं ऊँ महालक्ष्म्यै नम:

lakhsmiयदि ग्रहण काल में साधना का अवसर न प्राप्त हो सके तो कार्तिक मास में किसी भी शुभ मुहूर्त में सात दिन में यह पूजा संपन्न की जा सकती है। एकांत स्थान पर लाल रेशमी आसन बिछाएं। अपने सामने लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र की स्थापना करें तथा धूप-दीप से पूजा करें। यहां भी इस पूजा में लाल पुष्प और लाल ही नैवेद्य या फल अनिवार्य है। यह पूजा सात दिन में संपन्न होती है। ध्यान रखना चाहिए कि पहले दिन जो जप संख्या हो अनुष्ठान के सभी दिनों में उतनी ही जप संख्या होनी चाहिए। इस लिए मंत्र संख्या को पहले ही सात भागों में विभक्त कर लें। अंतिम दिन हवन करें तथा कुमारी कन्याओं को भोजन करा कर दक्षिणा दे कर विदा करें। मां लक्ष्मी की कृपा आप पर अवश्य होगी।

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