दीर्घायु तथा आरोग्यपूर्ण जीवन के लिए करें भगवान धनवंतरि का ध्यान

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मान्यता है कि भगवान धनवंतरि की पूजा से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है और ‘धन वर्षा’ करती हैं। दिवाली से  दो दिन पूर्व धनतेरस मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धनतेरस के दिन धातु की कोई वस्तु खरीदने का रिवाज काफी समय से है। कहते हैं कि इस दिन खरीदी गई वस्तु अत्यधिक फलदायक होती है।
पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय अन्य वस्तुओं के साथ अमृत कलश के साथ भगवान धनवंतरि का अविर्भाव हुआ और इसी के साथ हमें आयुर्वेद के ज्ञान का भंडार मिला। आज भी धनत्रयोदशी के दिन भगवान धनवंतरि की पूजा-अर्चना की जाती है। वैद्य एवं आयुर्वेद से जुड़े लोग यह पर्व विशेष रूप से मनाते हैं। धनवंतरि जयंती के दिन दीर्घायु की प्राप्ति तथा आरोग्यपूर्ण जीवन के लिए भगवान धनवंतरि का ध्यान और पूजन करना चाहिए। प्रातःकाल धनवंतरि जी का चित्र अथवा मूर्ति को चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछा कर स्थापित करें,फिर रोली, मौली, चंदन,अक्षत तथा चंदन से उनका पूजन करें। पुष्पमाला पहनाते हुए निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करें।
अहं हि धनवंतरिरादिदेवो,जरारूजामृत्युहरो अमरणाम्
शल्यांगमंगैरपरैरूपेतं प्राप्तोअस्मि गां भूय इहोपदेष्टुम्
अंत में धूप दीप दिखा कर धनवंतरि जी की आरती करें और सच्चे मन से कल्याण की कामना करें।  संध्या के समय घर के  बाहरी मुख्य द्वार के दोनों ओर मिट्टी के दीपक को तेल से भर कर उनमें स्वच्छ बत्ती डाल कर उन्हें प्रज्ज्वलित करें  और इन्हें दोनों ओर अन्न की ढेरी पर स्थापित करें दीपक रखते  समय दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके इस मंत्र का उच्चारण करें –
मृत्युना दंडपाशाभ्यां कालेन श्यामया सह
त्रयोदश्यां दीपनादात् सूर्यज प्रीयतां मम
ऐसा करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और उस घर के किसी भी सदस्य को  अकालमृत्यु, असाध्य बीमारियां और असफलता का भय नहीं रहता।

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