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जंगल की आग से हिमाचल की धरोहर खतरे में, लोगों पर आ सकती है आंच

massive fire broke out in forests of himachal loss estimated worth crores

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सोलन। जंगलों की आग लगातार बढ़ती ही जा रही है। अब जंगल की आग ने विश्व धरोहर कालका-शिमला रेल लाइन की और रुख कर लिया है, जिसकी वजह से आज जाबली के समीप 16 नंबर सुरंग के पास कालका से शिमला जा रही रेल कार को मजबूरन रोकना पड़ा। क्योंकि सुरंग से आगे भयंकर आग लगी हुई थी और इस आग में आगे जाना खतरे से खाली नहीं था। जंगल में भड़की आग को देखकर चालक ने रेल कार को पीछे ही रोक दिया। करीब 2 घंटे तक रेल कार को रोके रखा। जब आग पूरी तरह से बुझ गई, तब रेल कार को आगे ले जाया गया। ऐसे में तपती गर्मी और सुलगते जंगलों के बीच सफर कर रहे पर्यटकों को भारी दिक्कतों का सामान करना पड़ा। लेकिन, सुखद बात यह रही कि कुछ देर से ही सही। लेकिन, सभी यात्री अपनी मंजिल पर सकुशल पहुंचे।

सोलन में अब तक 85 लाख रुपये चपत

जिला सोलन की बात करें तो अभी तक 102 आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। केवल मई के महीने में करीबन 34 बार आग की घटनाएं घट चुकी हैं, जो संख्या में अब तक सबसे ज्यादा हैं। इन आग की घटनाओं में करीबन 85 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है और दमकल विभाग ने 8 करोड़ रुपये की निजी और सरकारी संपत्ति को जलने से बचाया है। दमकम केंद्र के अधिकारी महेश कुमार शर्मा ने बताया कि पूरे वर्ष में अभी तक मई के महीने में सबसे ज्यादा आग लग रही है।  उन्होंने बताया कि ज्यादातर आग सोलन के जंगलों को अपना निशाना बना रही है, जिसका सबसे बड़ा कारण जंगलों के आस पास रह रहे लोग हैं, जो अच्छे घास के लालच में जंगलों को आग के हवाले कर देते हैं। दूसरा बड़ा कारण लापरवाही से बीड़ी सिगरेट पी कर जंगलों में फैंकना है, जिसकी वजह से हरे भरे जंगल आज सूखने की कगार पर है।

रिहायशी एरिया में पहुंची जंगल की आग, सेब के पेड़ों को नुकसान

कुल्लू। जिला कुल्लू के दूर दराज क्षेत्र आनी के जंगल इन दिनों सुलग रहे हैं। जंगलों में लगी आग काबू पाना मुश्किल सा लग रहा है। घाटी में सेब के बागीचों को भी नुकसान पहुंच रहा है। जानकारी के अनुसार आनी के थनोग, ओलवा के जंगलों में लगी आग की चपेट में आने से बारवी, लढ़ोग आदि में सेस राम, अमर चंद, मोहर सिंह, संतोष कुमार, गंगा राम चंदेल व जय राम सिंघा के सेब के सैकड़ों पौधे झुलस गए हैं। उन्हें भारी नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

मंडी फॉरेस्ट डिविजन में 415 हेक्टेयर वन भूमि आई चपेट में

मंडी। हिमाचल के बाकी जिलों की तरह मंडी जिला में भी जंगल धू-धू कर जल रहे हैं। अभी मंडी शहर के साथ लगते जंगलों में आग लगी हुई है और इस पर काबू पाने के लिए वन विभाग की टीमें मौके पर मौजूद हैं। लेकिन, जंगल की आग पर काबू पाना वन कर्मियों के लिए काफी मुश्किल होता जा रहा है। डीएफओ मंडी सुरेंद्र कुमार कश्यप ने बताया कि वनों में लग रही आग पर काबू पाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि मौजूदा फायर सीजन में मंडी फॉरेस्ट डिविजन में अभी तक आगजनी की 89 घटनाएं घट चुकी हैं और यह सभी घटनाएं चीड़ के जंगलों में ही घटी हैं। इसके कारण करीब 415 हेक्टेयर वन भूमि आग की चपेट में आई है। इसमें 346 हेक्टेयर नॉन प्लांटिंग जबकि 80 हेक्टेयर एरिया प्लांटिंग वाला जलकर राख हुआ है। अभी तक अकेले मंडी डिविजन में ही 20 लाख की वन संपदा जलकर राख हो चुकी है। इसके बाकायदा पुलिस में मामले भी दर्ज करवाए जा रहे हैं।

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