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Union की Govt को चेतावनीः मांगें मानो या फिर गंभीर परिणाम…

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सरकार पर आरोप, मजदूरों के हकों के लिए गंभीर नहीं

Mid day meal workers union / शिमला।  मजदूर संगठन सीटू से संबंधित मिड-डे मील वरर्कज़ यूनियन ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि वह उनकी मांगों के प्रति गंभीर नहीं है। यूनियन का कहना है कि 13 वर्ष बाद मिड-डे मील वर्कर्ज के वेतन में 200 रुपए की बढ़ोतरी कर उनके साध भद्दा मजाक किया गया है। यूनियन ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो विधानसभा चुनाव में इसके गंभीर परिमाम भुगतने के लिए तैयार रहें।

यूनियन की आज हुई राज्य कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई और इस बढ़ोतरी को 24 हजार मिड-डे मील वर्कर्ज के साथ छल करार दिया गया। बैठक में कहा गया कि महंगाई के इस दौर में 200 रुपए की बढ़ोतरी करना सरकार के लिए शर्म की बात है। संघ की राज्य अध्यक्ष कांता महंत ने कहा कि इस फैसले से प्रदेश सरकार का गरीब विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार मिड-डे मील वर्कर्ज की मांगों के प्रति पूरी तरह अड़ियल रवैया अपनाए हुए है और इसकी संघ कड़ी निंदा करता है।

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वेतन बढ़ोतरी के मिले सिर्फ आश्वासन

महंत ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बार-बार मिड-डे मील वरर्कज के वेतन में बढ़ोतरी के आश्वासन दिए, लेकिन लागू नहीं किए। उन्होंने मांग की कि सरकार मिड-डे मील को 6000 रुपए न्यूनतम वेतन लागू करे और 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार देश में पहली सरकार है जो मिड-डे मील वरर्कज को सबसे कम वेतन दे रही है।

उन्होंने कहा कि बैठक में यूनियन ने फैसला लिया है कि यदि सरकार मिड-डे मील वरर्कज के वेतन में बढ़ोतरी नहीं करती है तो आने वाले विधानसभा चुनाव में सरकार को इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।  कांता महंत ने कहा कि यूनियन ने यह भी फैसला लिया है कि 30 मई को सीटू के स्थापना दिवस पर शिमला में हज़ारों की संख्या में मिड डे मील वरर्कज अपनी मांगों को मनवाने के लिए हल्ला बोलेंगे और विशाल जनसभा करेंगे। उन्होंने कहा कि इसके बाद संघ अपनी मांगों को लेकर आन्दोलन शुरू करेगा।

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