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बैजनाथ के गांव कंडी में निकले महाभारत काल के पत्थर

पत्थरों पर अंकित हैं देवी-देवताओं की आकृतियां

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बैजनाथ। कहते हैं कि प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यक्ता नहीं होती। कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है तहसील बैजनाथ के तहत आते गांव कंडी-मलघोटा में। जहां खुदाई के समय निकलीं पौराणिक काल की कुछ मूर्तियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। दरअसल, मान्यता है कि विश्व प्रसिद्ध बैजनाथ मंदिर का निर्माण पांडवों ने उस समय किया जब वे अज्ञात वास पर थे। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण एक ही रात में किया गया था और इस मंदिर के निर्माण के लिए जो पत्थर इस्तेमाल किए गए थे, वे साथ लगते कंडी, मलघोटा व खड़ानाल गांव से लाए गए थे। ऐसी मान्यताओं के चलते लोगों में इस ओर गहरा विश्वास है कि बुधवार को खुदाई के दौरान जो पौराणिक काल के पत्थर निकले हैं, वे बैजनाथ शिव मंदिर से ही संबंधित हैं। ऐसा इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि जो पत्थर खुदाई में निकले हैं, उनपर कुछ चित्र भी अंकित हैं। हू-ब-हू वैसे ही उकेरे गए, जैसे बैजनाथ शिव मंदिर में लगे पत्थरों पर अंकित हैं।

मलघोटा गांव में सड़क किनारे स्थापित है महाभारत काल की शिला

इस के बारे में जानकारी देते हुए स्थानीय युवती कोमल ठाकुर ने बताया कि, जहां यह पत्थर निकले हैं वहां साईं का एक मंदिर बनाया गया है। उसी मंदिर के आस पास की सफाई व अन्य कार्यों हेतु जब खुदाई की गई तो ये पत्थर सामने आए। कोमल ने बताया कि मलघोटा गांव में चौक के साथ लगते स्कूल के पास सड़क किनारे ही एक शिला भी स्थापित है। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों में यह मान्यता है कि यह शिला भी महाभारत काल से यहां स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इस शिला को भी बैजनाथ शिव मंदिर में स्थापित करने हेतु ले जाया जा रहा था। लेकिन किन्हीं कारणवश इसे ले जाया न जा सका और यह शिला तब से यहीं स्थित है और स्थानीय लोग प्रतिदिन इसकी पूजा भी करते हैं। मान्यता यह भी है कि जो बुजुर्ग या किसी असहाय लोग बैजनाथ मंदिर तक नहीं जा सकते उन्हें इस शिला के दर्शन व पूजा करने से ही बैजनाथ धाम के दर्शनों का फल प्राप्त हो जाता है। बहरहाल, खुदाई में निकले पत्थरों बारे पुरात्तव विभाग को सूचित कर दिया गया है।

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