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रत्न धारण करने से पहले जरा सोचिए…

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हममें से अधिकांश लोग अपने फायदे या फिर आगे बढ़ने के लिए नग या रत्न धारण करते हैं। कई लोग तो ज्योतिषियों के कहने पर रत्न धारण करते हैं और कुछ एक दूसरे की देखा-देखी ऐसा करते हैं। जैसे कोई आय बढ़ाने के लिए पुखराज तो गुस्सा कम करने के लिए मोती पहन लेता है। लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि अगर ये रत्न आपके अनुकूल नहीं है तो ये आपके लिए खतरनाक भी साबित हो सकते हैं यानी फायदे की जगह नुकसान अधिक हो सकता है।
नवरत्न किसी भी राशि वाला धारण करता सकता है, जिन व्यक्तियों के पास जन्मकुंडली नहीं है, जिनके लिए रत्नों का निर्धारण करना कठिन होता है उनके लिए नवरत्न अंगूठी, माला, पैडल, बाजूबंद या कड़ा धारण करना श्रेयस्कर होता है नवग्रह शांत व शुभ फल देते हैं व धारक को सुख संपदा करते है अनिष्टों का अंत होता है रोगों से मुक्ति मिलती है साथ ही नवरत्न इकट्ठे धारण करने से नीलम आदि रत्न भी अपना दुष्प्रभाव न दिखकर धारक को लाभ ही प्रदान करते हैं।
मेरू श्री यंत्र अष्ट धातु या स्फटिक शिला पर खोदकर बारीकी से काटकर बनाया गया मेरू आकार (कछुए की पीठ के आकार की) श्री यंत्र गृहस्थ के लिए धन संबंधी भाग्योदय के लिए सबसे उत्तम व श्रेष्ठ माना जाता है। रत्नों का पेड़ घर या आफिस में रखने से उन्हें नकारात्मक ऊर्जा से बचाकर सकारात्मक ऊर्जा से भरते हैं , वहां की सुख समृध्दि व शांति में वृध्दि करते हैं। यह रत्न वृक्ष नजर , जादू टोना ,भूत प्रेत इत्यादि दुष्‍प्रभावों से बचाता है।

पिरामिड अत्याधिक प्रभावशाली ऊर्जा है स्फटिक व अष्टधातु से निर्मित पिरामिड को घर आफिस आदि स्थापित करने से ये वहाँ की सकारात्मक ऊर्जा को कई गुना बढ़ाते हैं जिससे मानसिक कार्यक्षमता में कई गुना वृद्धि होती है वहां की शांति धन धान्य,सुख समृधि बढ़ती है। आधुनिक समय में 95 प्रतिशत भवनों में वास्तु दोष व्याप्त है, जिससे व्यक्ति के जीवन रोग, क्लेश, तनाव, दरिद्रता व शत्रुता होती है पिरामिडों को वास्तु दोष निवारण का अचूक उपाया माना जाता है

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