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चांद से सीधी मुलाकात

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इससे पहले तो चांद दूर से ही खूबसूरत, सलोना और आकर्षक लगता था। बच्चों का प्यारा चंदामामा, पर चांद से सीधी मुलाकात हुई 20 जुलाई 1969 को हुई जब चांद की सतह पर मानव के पहले कदम पड़े। वह अविस्मरणीय क्षण था जब नील आर्मस्ट्रांग ने चांद की सतह पर खड़े होकर कहा था-भले ही मानव का यह छोटा सा कदम है लेकिन मानवता के लिए बहुत ऊंची छलांग है।
सदियों से शीतल चांदनी बिखेरते, मानव मन को मोहते और उसकी कल्पनाओं में रंग भरते चांद से मानव की यह पहली सीधी मुलाकात थी। केप केनेडी से अपोलो11 यान 16 जुलाई 1969 को चांद की ओर रवाना हुआ। इसमें तीन यात्री थे नील आर्मस्ट्रांग, माइकल कालिंस और एडविन एल्ड्रिन। चंद्रमा के निकट पहुंचकर परिक्रमा यान से चंद्रयान ईगल अलग हो गया।

ईगल, नील आर्मस्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन को लेकर रात 1 बज कर 47 मिनट पर चंद्रमा पर उतर गया। नील ने अपना पहला कदम रखने के बाद चांद की सतह को देखा और कहा-यहां आसपास बहुत बड़े बड़े पत्थर हैं। चांद की सतह बहुत सख्त है और मिट्टी रेगिस्तान जैसी है। दृश्य बहुत सुंदर है और जहां हम उतरे हैं उससे कुछ ही दूरी पर बैंगनी रंग की चट्टान दिखाई दे रही है। सूर्य के प्रकाश में चांद की मिट्टी और चट्टानें चमक रही हैं। यह एक शानदार मगर बिल्कुल खामोश जगह है। दोनों अंतरिक्षयात्रियों ने चांद की सतह से मिट्टी और चट्टानों के नमूने लिए। उन्होंने वहां स्मृतिचिन्ह के रूप में एक धातु फलक लगाया जिस पर तीनों अंतरिक्ष यात्रियों और अमेरिका के राष्ट्रपति के हस्ताक्षर थे।

एक संदेश भी था जिसे नील आर्मस्ट्रांग ने जोर से पढ़ा….

यहां पृथ्वीग्रह से आकर चांद पर मानव ने पहली बार अपने कदम रखे। हम यहां समस्त मानव जाति के लिए शांति की कामना लेकर आए हैं। ईगल 21 घंटे 31 मिनट तक चंद्रमा पर रहा और अंतरिक्ष यात्री चहलकदमी करते रहे।

24 जुलाई को चंद्रयान धरती पर सुरक्षित लौट आया और इस तरह अमेरिका चांद पर मानव भेजने वाला पहला देश बन गया। कुछ और कहानियां भी इस घटना के साथ जुड़ती रहीं। जैसे कहा गया कि चांद का दूसरा हिस्सा जो पृथ्वी से नहीं दिखाई देता वहां एलियंस का बेस कैंप है। चांद पर एलियंस के होने का दावा करने वाले भी अंतरिक्षयात्री ही थे। उन्होंने चांद पर उतरने के कुछ ही देर बाद वहां उडऩतश्तरियां देखीं जो वहां एक क्रेटर के पास खड़ी थीं क्रेटर में प्रकाश था। रिकार्डेड वार्तालाप के अनुसार यहां से पूछा गया कि वहां क्या है…? जवाब में अपोलो से बताया गया-ओह माय गॉड यू वोंट विलीव इट, देयर आर अदर स्पेस क्रॉ ट्स लाइन्डअप ऑन फार साइड ऑफ क्रेटर एज। दे आर वाचिंग अस। नील आर्मस्ट्रांग अब नहीं हैं उनका निधन 82 साल की उम्र में 25 अगस्त 2012 को हुआ पर चांद पर उनका पहला कदम इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया।

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