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धर्म-संस्कृति

culture and spirituality

अक्षय तृतीया : सोना खरीदना शुभ… ठंडी चीजों का दान भी करें 

हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया कहा जाता है। इसे अत्यंत शुभ तिथि माना गया है। इस दिन का अर्थ है जो कभी क्षय न हो या  नष्ट न हो इसलिए इस दिन लोग सोने की खरीददारी करते हैं।

सूही मेला : रानी चम्बयाली रे देसा हो …

सूही मेला चंबा की रानी सुनयना के त्याग की स्मृति में मनाया जाता है। उन्होंने चंबा की प्रजा के लिए स्वयं का बलिदान दिया और जीवित समाधि लेने से पहले उन्होंने आग्रह किया कि चैत्र-वैशाख मास में उनकी स्मृति में मेले का आयोजन किया जाए।

कौन करता है ईश्वरा महादेव की पूजा …

मुरैना में पहाड़गढ़ से लगभग 15 किलोमीटर दूर घने जंगलों में अल सुबह होने वाली पूजा अब तक रहस्य बनी हुई है। लगभग 1000 साल पहले इन जंगलों में प्राकृतिक झरने के नीचे विराजमान ईश्वरा महादेव का पता चला। किंवदंती है कि इसकी स्थापना रावण के भाई विभीषण ने की थी।

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हनुमान होंगे प्रसन्न अगर करेंगे यह सब …

व्रत रखने वाले व्रत की पूर्व रात्रि ब्रह्मचर्य का पालन करें व जमीन पर ही सोयें तो अच्छा रहता है। प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में उठें, प्रभू श्री राम, माता सीता एवं हनुमान का स्मरण करें। फिर नित्य क्रिया से निवृत होकर स्नान करें।

चैत्र नवरात्र का चढ़ावा : नैना देवी में चढ़ा 91 लाख नगद,सोना-चांदी व विदेशी मुद्रा भी

शक्तिपीठ श्री नैना देवी में इस बार चैत्र नवरात्रों में रिकॉर्ड चढ़ावा चढ़ा। नवरात्र के दौरान जहां लाखों श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन किए, वहीं मंदिर में चढ़ावा भी दिल खोलकर चढ़ाया। वहीं, त्रिलोकपुर मेले के 11वें दिन तक 5 लाख  35 हजार श्रद्धालुओं ने किए माता के दर्शन कर 1 करोड़ 21 लाख 22 हजार 639 रुपए की नकदी मां के चरणों में अर्पित की।

सिद्धि और मोक्ष देने वाली सिद्धिदात्री

नवरात्र के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवमी के दिन सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है। सिद्धियां हासिल करने के उद्देश्य से जो साधक भगवती सिद्धिदात्री की पूजा कर रहे हैं उन्हें नवमी के दिन इनका पूजन अवश्य करना चाहिए।

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हर संकट दूर करें मां कात्यायनी

नवरात्र के छठे दिन देवी दुर्गा के छठे रूप देवी कात्यायनी की पूजा होती है। माता अपने भक्तों पर बहुत जल्द ही प्रसन्न हो जाती हैं तथा उनकी हर मुराद को पूरी करती है। देवी दुर्गा ने ऋषि कात्यायन के कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर, वरदान स्वरूप उनके घर जन्म लिया तथा ऋषि कात्यायन के नाम पर ही उनके षष्ठम रूप का नाम कात्यायनी देवी पड़ा।

सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी मां स्कंदमाता

मां दुर्गा की पांचवी शक्ति का नाम स्कंदमाता है। नवरात्र के पांचवे दिन इन्हीं की पूजा की जाती है। इस दिन साधक का मन विशुध्द चक्र में होता है। स्कंद कुमार (कार्तिकेय) की माता होने के कारण दुर्गा जी के इस पांचवे स्वरूप को स्कंद माता नाम प्राप्त हुआ है।

रोग-शोक नष्ट करे मां कूष्मांडा

मां दुर्गा का चतुर्थ रूप श्री कूष्मांडा हैं। अपने उदर से अंड अर्थात ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्मांडा देवी के नाम से पुकारा जाता है। नवरात्र के चतुर्थ दिन इनकी पूजा की जाती है। मां कूष्मांडा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं। इनकी आराधना से मनुष्य त्रिविध ताप से मुक्त होता है

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शांतिदायक और कल्याणकारी मां चंद्रघंटा

मां दुर्गा की तृतीय शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्र के तीसरे दिन इन का पूजन किया जाता है। मां का यह स्वरूप शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसीलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनका शरीर स्वर्ण के समान उज्ज्वल है, इनके दस हाथ हैं।