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साहित्य

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दहलीज़

पिछली रात रूनी को लगा कि इतने बरसों का कोई पुराना सपना धीमे कदमों से उसके पास चला आया है। वही बंगला था, अलग कोने में पत्तों से घिरा हुआ... वह धीरे-धीरे फाटक के भीतर घुसी है... मौन की अथाह गहराई में लॉन डूबा है... शुरू मार्च की वसंती हवा घास को सिरह-सहला जाती है... बरसों पहले के रिकार्ड की धुन छतरी के नीचे से आ रही है... ताश के पत्ते घास पर बिखरे हैं... लगता है, जैसे शम्मी भाई अभी खिलखिलाकर हंस देंगे और आपा (बरसों पहले जिनका नाम जेली था) बंगले के पिछवाड़े क्यारियों को खोदती हुई पूछेगी- रूनी, जरा मेरे हाथों को तो देख कितने लाल…

एक अच्छा दिन

यह संयोग ही था कि नया साल और जुलेखा का जन्मदिन एक साथ ही पड़ता था। अमूमन सभी दोस्तों को याद भी रहता था इसलिए हैप्पी न्यू ईयर के साथ हैप्पी बर्थडे भी चल जाती थी। इस साल एक और खास बात भी हुई कि उसका वीकली ऑफ भी उसी दिन पड़ गया। जुलेखा ने तय किया कि आज का यह दिन वह सिर्फ अपने लिए रखेगी। सुबह आठ बजे वह धर्मशाला जाने वाली बस में थी, वहां से उसे मैक्लोडगंज जाना था। मैक्लोडगंज की बस में ज्यादा भीड़ नहीं थी, पर जाने का समय आते-आते पूरी बस भर गयी। छोटी बसें पहाड़ी घुमावदार रास्तों के लिए ठीक होती हैं , पर इनकी लदान देख कर छक्के छूट जाते…

मैदान

हमारी आदत सी है कि हम अक्सर ही कुछ कहीं रख कर भूल जाते हैं। कभी-कभी कुछ यादें भी पुराने खतों की तरह और एक दिन जब कुछ ढूंढने लगते हैं तो जाने कितनी यादों की खिड़कियां खुल जाती हैं. . कभी भी न भूलने वाली यादें, जिनका रंग कभी फीका नहीं होता। जैसे पहले प्यार के एहसास में डूबी कोई शाम , अस्त होते सूरज की रोशनी, पंछियों की आवाजें और महकती सांसों की अनुभूति। बारिश घिर कर आ गयी थी। लगता था जैसे आसमान और धरती के बीच एक चादर सी तन गई हो। शुभा ने उठ कर खिड़की से पर्दा हटा दिया। बारिश की फुहार उसका चेहरा भिगो गई। पहाड़ों पर तेजी से बर्फ…

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मेरे साथ चलोगी ?

टेलीविज़न पर मुंबई और दिल्ली दोनों ही शहर पानी से सराबोर होते दिखाई दे रहे थे। पानी सड़कों पर इस तरह भरा था कि किसी बरसाती नदी का भ्रम होता था। उस पानी में आदमी चलते दिखाई दे रहे थे और बतखें भी, बतखों के बगल में कारें चल रही थीं। तो महानगरों में बारिश हो रही थी और पहाड़ सूखे थे.. उमस-गर्मी से लोग बेहाल थे। किसान-बागबान परेशान थे-बारिश न हुई तो क्या होगा ? वह एक लोकल अख़बार का दफ्तर था जहां वीथिका काम करती थी। उसके विभाग में कुल चार लोग थे जीनिया मैगजीन बनाती थी, अभय एडिट पेज बनाता था, समीर रेफरेंस इंचार्ज था और वह खुद। ये सारे…

गुनगुन चिड़िया

राजू को जब बार-बार मां ने कहा कि वह चिड़ियों के लिए बारजे पर दाना पानी रख दिया करे, तो उसने इसे अपना नियम बना लिया। उसका अपना कमरा भी उसी के पास था जहां दोनों बर्तन रखे हुए थे । रोज सुबह जागने से पहले वह चिड़ियों की आवाजें सुनता और खुश हो जाता। चिड़िया दाना खातीं पानी पीतीं और उड़ जातीं। कुछ दिनों बाद राजू ने देखा कि एक बुलबुल उसकी खिड़की पर आकर बैठ जाती है और उसे पढ़ता हुआ देखती रहती है। वह रविवार का दिन था राजू ने कुछ देर और सोने की सोची। वह चिड़ियों के शोर के बावजूद नहीं उठा । उसकी आंखें तब खुल गईं जब उसने अपनी खिड़की…

एक हवा महकी सी

फिर साढ़े सात बजे हैं, अचानक ही अनवर की नज़र आसमान पर चली गयी है। ठीक इसी वक्त रोज एक हवाई जहाज उसकी छत से हो कर गुजरता है। तब वह देर तक आसमान की ओर देखता रह जाता है, खाली आकाश उड़ते परिंदे और सर-सर करती हवा। उसे लगता है , कहीं पर वह बहुत अकेला पड़ गया है.. जैसे अचानक ही सब कुछ बदल गया हो, ममा, पापा, दोस्त और आस-पास की हवा, सभी कुछ। बचपन, लगता है उससे बहुत दूर छूट गया है किसी खुशगवार मौसम की तरह। वह उसे सीने से लगाए रखना चाहता है, पर सब कुछ रेत की तरह हाथों से फिसलता जा रहा है। आँखों में है एक कोमल सा सपना , एक खूबसूरत सी लड़की…

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एक रात के साथी

अजीब सी हालत में फंस गए थे सब लोग। कांगड़ा से बस चली थी, तो सिर्फ तेज बारिश थी, पर यह कोई नई बात नहीं थी। ऐसा तो रोज ही होता था। लोग बस में बैठ कर चल दिए थे, किसी को भी अंदाजा नहीं था कि आगे क्या होने वाला था। वंदना के आगे वाली सीट पर एक युवा जोड़ा था। नन्हा बच्चा गोद में था और उनकी चुहलें जारी थीं। पुरुष अपनी किसी कामयाबी की डींगें मार रहा था और बीवी मुस्कराए जा रही थी। तीन किलोमीटर जा कर बस एक झटके के साथ रुक गयी। -क्या हुआ ? किसी ने पूछा। -कुछ नहीं चैकिंग के लिए रोका है। अपने-अपने टिकट संभाल लो। कहता हुआ कंडक्टर बस से…

पोस्टमैन

लिफाफे के बाहर पता यों लिखा हुआ था : सोसती सिरी सरबोपमा - सिरीमान ठाकुर जसोतसिंह नेगी, गांव प्रधान - कमस्यारी गांव में, बड़े पटबांगणवाला मकान, खुमानी के बोट के पास पता ऊपर लिखा, पोस्ट बेनीनाग, पास पत्न ठाकुर उन्हीं जसोत सिंह नेगी को जल्द-से-जल्द मिले - भेजने वाला, उनका बेटा रतन सिंह नेगी। हाल मुकाम - मिलीटरी क्वाटर, देहरादून। पोस्ट-जिला-वही। कियरोफ फिप्टी सिक्स ऐ.पी.ओ. बटैलन नंबर-के-बी-2, थिरी-थिरी नायन। सिपोय नंबर... भेजने वाले के पते में से कई शब्द कटे हुए थे। पाने वाला का पता इस तरह लिखा गया था कि केवल टिकट ही पते की…

युवा शिखर साहित्य सम्मान के लिए गौरीनाथ और मुरारी शर्मा का चयन

शिमला। साहित्यिक संस्था शिखर शिमला द्वारा दिया जाने वाला प्रतिष्ठित युवा शिखर साहित्य सम्मान इस बार दो महत्वपूर्ण युवा कथाकारों गौरीनाथ और मुरारी शर्मा को दिए जाने का निर्णय लिया गया है। शिखर संस्था के अध्यक्ष दिनेश मल्होत्रा की अध्यक्षता में आयोजित निर्णायक मंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। प्राप्त प्रविष्टियों और संस्तुतियों पर विचार करने के बाद युवा शिखर सम्मान 2016 और 2017 के लिए क्रमश: मुरारी शर्मा और गौरीनाथ का चयन किया गया। मंडी हिमाचल प्रदेश से संबंध रखने वाले मुरारी शर्मा के दो कहानी संग्रह बाणमूठ और धार पर…

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शाह की कंजरी

उसे अब नीलम कोई नहीं कहता था, सब शाह की कंजरी कहते थे। नीलम को लाहौर हीरामंडी के एक चौबारे में जवानी चढ़ी थी और वहां ही एक रियासती सरदार के हाथों पूरे पांच हजार में उसकी नथ उतरी थी और वहां ही उसके हुस्न ने आग जलाकर सारा शहर झुलसा दिया था। पर फिर एक दिन वह हीरामण्डी का सस्ता चौबारा छोड़कर शहर के सबसे बड़े होटल फ्लैटी में आ गई थी। वही शहर था, पर सारा शहर जैसे रातोंरात उसका नाम भूल गया हो, सबके मुंह से सुनाई देता था - शाह की कंजरी। गज़ब का गाती थी। कोई गानेवाली उसकी तरह मिरजे की 'सद नहीं लगा सकती थी इसलिए लोग चाहे उसका नाम भूल…