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72 दिन का इंतजार खत्म, Nigeria से सकुशल घर पहुंचे Kangra के तीनों लाल; सबने गले लगाए

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Nigeria में डकैतों ने कर लिया था कैद, हर रोज 1 या दो मैगी खाकर गुजारा वक्त

टीम/ नगरोटा बगवां/ नगरोटा सूरियां/ पालमपुर। 72 दिनों तक मर-मर कर जिए, कांगड़ा के तीन लाल आज सुबह अपने परिवार से मिल गए। लंबे इंतजार के बाद अपने बेटों को देख बुजु्र्ग मां-बाप की आंखों से मानो समंदर बह गया। बहरहाल, Nigeria में कैद Kangra के तीनों युवक रविवार सुबह अपने घर सकुशल लौट आए। Nagrota Bagwan की उस्तेहड़ पंचायत के पंकज कुमार, Palampur के अजय और Nagrota Surian के ग्रुप कैप्टन सुशील धीमान अब अपने परिजनों संग खुश है। सुबह सवेरे प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विधायक भी इन युवाओं का स्वागत करने के लिए पहुंचे। गौर रहे कि नगरोटा विधानसभा की उस्तेहड़ ग्राम पंचायत के पंकज कुमार की घर वापसी का पूरे गांववासियों के साथ-साथ स्थानीय विधायक अरुण मेहरा ने रढ़ चौक पर स्वागत किया। इस खास मौके पर पंकज की मां सुलोचना देवी और पिता वेदप्रकाश ने पिछले चार महीने से बिछुड़े अपने लाडले के दीदार किए। पंकज कुमार ने बताया कि 72 दिन तक लुटरों ने उन्हें एक टापू में रखा था और खाने के नाम पर मैग्गी के महज एक या दो पैकेट ही मिलते थे और उसी से गुजारा करना पड़ता था। उन्होंने बताया कि वह दोबारा वहां जाने के बारे फिलहाल सोच भी नहीं सकते। पंकज ने प्रदेश सरकार के साथ-साथ सांसद शांता कुमार, विधायक अरुण मेहरा और केंद्र सरकार का धन्यवाद किया है। उधर, सुशील कुमार भी रविवार सुबह नगरोटा सूरियां में अपने घर पहुंचे। घर में बेटे के स्वागत के लिए मां ने विशेष इंतजाम कर रखा था। लंबे समय बाद परिवार वालों से बात की तो सुशील की आंखों से आंसू छलक आए। बता दें कि नाइजीरिया में सुमद्री लुटेरों के चंगुल से छूटने के बाद रविवार को कांगड़ा जिला के तीनों युवकों की आखिरकार घर वापिसी हो ही गई। अपने अन्य दो साथियों के साथ अपने घर नगरोटा पहुंचे सुशील कुमार ने पूरे परिवार के साथ अपने दुख साझा किए। अपने बेटों को सही सलामत देख परिवार वालों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। सुशील और उनके दोनों साथी आज रविवार को Delhi से Himachal अपने अपने घर पहुंच चुके हैं, जिसके बाद परिवार वालों में खुशी का माहौल है। Palmpur से अजय की माता कमला ने बताया कि बच्चों के बंधक बनाए जाने की बात का पता लगते ही परिवार वालों ने कई रातें जाग-जाग कर काटी हैं कि कब क्या फोन आ जाए और क्या सुनेंगे। फोन की घंटी बजने पर ही उनको डर लगने लगता था। इसी बीच अजय के पिता को ब्रेन हैम्रेज भी हुआ, जिससे परिवार और मुश्किल में फंस गया था, लेकिन अब वह ठीक हैं। बहन आशा का कहना है कि अजय की रिहाई के लिए उन्होंने हर समय मां चामुंडा के सामने ही पूजा-अर्चना की है। उन्हें मां चामुंडा पर पूरा विश्वास था कि उनका भाई सकुशल देश लौटेगा। इसके लिए उन्होंने मां से मन्नत मांगी थी। इसे पूरा करने के लिए वह भाई और परिवार के साथ माता चामुंडा के मंदिर जाएंगे।

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